एडवर्ड स्नोडेन के ज़रिए लीक किए गए नए दस्तावेज़ों के अनुसार अमरीकी
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने पिछले दो सालों में गोपनीयता के
क़ानून का हज़ारों बार उल्लघंन किया है।
इन दस्तावेज़ों के अनुसार एनएसए ने ग़ैरक़ानूनी ढंग से अमरीकी नागरिकों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की।
इन
दस्तावेज़ों के कुछ अंश गुरुवार को वाशिंगटन पोस्ट की वेबसाइट पर जारी किए
गए। वेबसाइट ने कहा है कि उसे ये दस्तावेज़ स्नोडेन से मिले हैं।
स्नोडेन एनएसए के लिए कांट्रैक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।
स्नोडेन
गार्डियन और वाशिंगटन पोस्ट अख़बारों को एनएसए निगरानी संबंधित दस्तावेज़
लीक करने के कारण जून में अमरीका से पलायन कर गए थे।
इस वक़्त स्नोडेन रूस में हैं जहां उन्हें अस्थाई शरण प्राप्त है।
ऑपरेटर की भूल
इन
दस्तावेज़ों के अनुसार अमरीकी और विदेशी नागरिकों के टेलीफ़ोन और ईमेल की
निगरानी भूलवश और एजेंसी की मानक प्रक्रिया की अनदेखी का नतीजा थी। एजेंसी
ने गुप्त निगरानी के उन तरीक़ों का भी प्रयोग किया था जिन्हें अदालत ने बाद
में असंवैधानिक घोषि़त कर दिया था।
इन दस्तावेज़ों में आमतौर पर
अमरीकी कांग्रेस, अमरीका के न्याय विभाग और डाइरेक्टरेट ऑफ़ नेशनल
इंटेलिजेंस के निदेशक के साथ साझा की जाने वाली जानकारियों से ज्यादा
जानकारियां हैं।
मई, 2012 में की गई एक आंतरिक ऑडिट में पिछले 12
महीने में अवैध ढंग से डेटा कलेक्शन के 2,776 मामले हुए थे। हालांकि इस तरह
से डेटा कलेक्शन की दर गिरती ही रही है।
हालांकि यह नहीं स्पष्ट है कि कितने नागिरकों की अवैध निगरानी की जा रही थी।
एनएसए की प्रतिक्रिया
एनएसए
ने अपने फाइबर ऑप्टिकल केबल से भारी मात्रा में विदेशी डेटा को नष्ट कर
दिया है। इसके कुछ महीनों बाद अदालत ने कहा था कि एनएसए के निगरानी
कार्यक्रम में अमरीकी संविधान द्वारा प्रदत्त निजता की सुरक्षा का उल्लघंन
होता है।
एनएसए के डाइरेक्टर ऑफ़ कम्प्लायंस जॉन डिलांग ने बीबीसी
से कहा, “हम हर रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हैं। उसकी जांच करते हैं और
उसका समाधान करते हैं। यह हमारे आंतरिक निगरानी का अंग है।”
अमरीकी
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एडवर्ड स्नोडेन द्वारा लीक किए गए दस्तावेज़ों
में उल्लेखित कार्यक्रमों का बचाव किया था। ओबामा ने बेहतर सुरक्षा निगरानी
के लिए ज़रूरी सुधार करने का वादा भी किया था।
पिछले हफ़्ते ओबामा
ने कहा था, “सरकार द्वारा दुरुपयोग के मामलों के इतिहास को देखते हुए
निगरानी कार्यक्रमों पर सवाल उठाना वाजिब है, ख़ासकर ऐसे समय में जब तकनीक
हमारे जीवन के प्रत्येक अंग को प्रभावित कर रही है।”