अमेरिका में 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनावों में दखल को लेकर अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने 13 रूसी नागरिकों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने गैर-कानूनी तरीकों से अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप की कोशिश की।
इनमें से तीन लोगों पर तकनीक के जरिए धोखाधड़ी करने और किसी और की पहचान इस्तेमाल करने का आरोप है। इसके अलावा तीन रुसी कंपनियां भी इस जुर्म में शामिल बताई गई हैं। मीडिया के सामने डिप्टी अटॉर्नी जनरल रॉड रोसनस्टाइन ने बताया कि किसी अमेरिकी नागरिक पर गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप नहीं था और ना ही रूस की इन कोशिशों से चुनाव के नतीजों पर कोई प्रभाव पड़ा।
क्या हैं आरोप?
चार्जशीट के मुताबिक इन रूसी नागरिकों ने खुद को अमेरिकी दिखाकर अपने नाम पर बैंक अकाउंट खोले और राजनीतिक विज्ञापनों पर हजारों डॉलर खर्च किए। अमेरिका में राजनीतिक रैलियां करवाईं। इन लोगों ने असली अमेरिकी नागरिकों के फेक सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर राजनीतिक पोस्ट लिखे। ऐसी जानकारियां फैलाईं जिससे हिलेरी क्लिंटन का कद छोटा हो। पैसे लेकर अमेरिका की सोशल मीडिया साइटों पर लिखा।
इनका बजट महीने में 12 लाख 50 हजार डॉलर होता था। ये लोग देखते थे कि उनके इंटरनेट पोस्ट का प्रदर्शन लोगों के बीच कैसा रहा और फिर उसके हिसाब से अपनी रणनीति बनाते थे।
ट्रंप ने दी अपनी सफाई
इस चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि इन लोगों ने 2014 की शुरूआत में ही चुनावों के प्रभावित करने की तैयारियां शुरू कर दी थीं। राष्ट्रपति
ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया कि 'मेरे राष्ट्रपति चुनावों में खड़े होने के ऐलान से पहले ही
रूस ने 2014 में अमेरिकी चुनावों के खिलाफ तैयारियां शुरू कर दी थीं। चुनावों के नतीजे इससे प्रभावित नहीं हुए। ट्रंप कैंपेन ने कोई गलत काम नहीं किया।'
रूस की प्रतिक्रिया
रूस ने भी इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि ये आरोप बेतुके हैं। उन्होंने पूछा कि क्या 13 लोगों का अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करना मुमकिन है जहां करोड़ों डॉलर सुरक्षा एजेंसियों का बजट है।
चार्जशीट में नामजद रूस के जेनी प्रगोशिन जिन्हें रूस के राष्ट्रपति पुतिन का करीबी माना जाता है, उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी बहुत अतार्किक लोग हैं। वे वही देखते हैं जो वो देखना चाहते हैं।