डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से ही रूस व अमेरिका के एक-दूसरे के करीब आने की कवायद पूरी दुनिया को बेचैन करने लगी थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने के पश्चिमी देशों के प्रस्ताव पर जब रूस ने वीटो किया तब पहली बार रूस और ट्रंप प्रशासन के बीच टकराव की नौबत आ गई।
प्रस्ताव में सीरिया के कुछ संगठनों, लोगों और कंपनियों पर भी प्रतिबंध की पेशकश थी। सभी आरोपियों पर पिछले छह साल से जारी गृह युद्ध के दौरान रसायनिक हमले करने और इस तरह की घटनाओं में शामिल होने का आरोप है।
यह सातवां मौका है जब रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो का उपयोग करते हुए सीरिया की असद सरकार को बचाया है। रूस की इस कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मूल की अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कहा कि यह एक निराशाजनक दिन है, दुनिया अब निश्चित रूप से अधिक खतरनाक जगह पर आ गई है। हेली ने रूस के खिलाफ सख्त रवैया अपनाए जाने की इच्छा के संकेत भी दिए।
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का कहना है कि सीरिया के खिलाफ प्रतिबंध ‘पूर्णतया अनुचित’ होंगे, जिससे सिर्फ शांति वार्ता को नुकसान और भरोसे को ठेस लगेगी। रूस के साथ चीन ने भी सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर वीटो कर दिया है।
उधर, ब्रिटिश राजदूत मैथ्यू रिक्राफ्ट ने कहा है कि रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन को रोकने के विश्वास को कमजोर बना रहा है साथ ही हमलों की चपेट में आने वाले सीरिया के लोगों के भरोसे को भी नुकसान पहुंचा रहा है। जबकि सीरिया ने 2013 में रूस और अमरीका के बीच हुए समझौते के तहत अपने रासायनिक हथियारों को नष्ट करने की सहमति दी थी।