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वो निडर पत्रकार था जिसका सिर कलम हुआ

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स्टीवेन सोटलॉफ दूसरे अमेरिकी पत्रकार हैं जिनका इस्लामिक स्टेट ने कत्ल करने का दावा किया है।
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अमेरिका ने उस वीडियो को सही बताया है जिसमें सोटलॉफ नारंगी जंपसूट पहने एक नकाबपोश के आगे घुटनों के बल बैठे हैं। इसके बाद उनका सिर कलम कर दिया जाता है।

इससे पहले पत्रकार जेम्स फॉली के कत्ल के वीडियो को अंत में एक नकाबपोश ने सोटलॉफ के कत्ल की धमकी दी थी।

31 वर्षीय सोटलॉफ का एक साल पहले सीरिया में अपहरण किया गया था।

आशंका है कि उन्हें एलेप्पो के नजदीक अगवा किया गया और रक्का में रखा गया था।

रिपोर्टों के मुताबिक सोटलॉफ के परिवार ने उनकी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उन्हें अगवा किए जाने की खबर सार्वजनिक नहीं की थी।

मियामी में पले-बढे

स्वतंत्र पत्रकार सोटलॉफ ने टाइम्स पत्रिका, फॉरेन पॉलिसी, क्रिश्चियन साइंस मॉनीटर और वर्ल्ड अफेयर्स जर्नल समेत कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख लिखे थे।

वे मिस्र, लीबिया और सीरिया से रिपोर्टिंग कर चुके थे।

अपने ट्विटर अकाउंट पर उन्होंने खुद को 'स्टैंड अप फिलॉस्फर फ्रॉम मियामी' बताया है। उनका ट्विटर अकाउंट तीन अगस्त 2013 से निष्क्रिय है।

उन्होंने सीरिया, लीबिया, मिस्र और तुर्की के बारे में ट्वीट किए। साथ ही उन्होंने मियामी हीट बॉस्केटबॉल टीम के प्रति अपने लगाव के बारे में भी बताया।

मियामी में पले बडे सेटलॉफ ने यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में पत्रकारिता की पढाई की थी।

पत्रकारिता से प्यार

उनके दोस्त इमर्सन लोट्जिया ने बीबीसी को बताया कि उन्हें पत्रकारिता से प्यार था।

उन्होंने बताया, "स्टीव बताते थे कि वहाँ हालात बहुत डरावने और खतरनाक थे। वहाँ रहना सुरक्षित नहीं था। ये जानते हुए भी वे वहाँ जाते रहते थे।"

उनके लेख बताते हैं कि खतरों के बावजूद वे जमीनी रिपोर्टिंग के लिए कितने प्रतिबद्ध थे।

स्टीवेन सोटलॉफ की माँ शिर्ले सोटलॉफ ने चरमपंथियों से अपने बेटे को रिहा करने की अपील की थी।

साल 2013 की अपनी एक रिपोर्ट में उन्होंने मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड कैंप का विवरण दिया है। बावजूद इसके कि उनके दोस्तों ने उन्हें वहाँ न जाने की सलाह दी थी और
संभावित खतरों के बारे में आगाह किया था।

उन्होंने लिखा था, "मीठी चाय के कई कपों और एक घंटे के अर्थहीन संवाद के बाद मैं उठा, अहमद से हाथ मिलाया और सीधे वहाँ गया जहाँ उन्हें लगता था कि मुझे खतरा होगा।"

वे अक्सर युद्ध के मानवीय पहलू पर रिपोर्टें लिखते थे।

2013 के शुरुआती दिनों में विस्थापित सीरिया नागरिकों के संघर्ष और भोजन-पानी की कमी के बारे में उन्होंने अपनी रिपोर्टों में लिखा है।
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विचारशील पत्रकार

उन्होंने 2012 में बेनगाजी में अमेरिकी दूतावास के हमले के बारे में भी रिपोर्टिंग की थी।

उस वक्त फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने किसी भी संभावित अमेरिकी हमले में सावधानी बरतने के लिए चेताया था।

लेखिका एन मारलो जो सोटलॉफ को लीबिया में किए गए उनके काम से जानती हैं बताती हैं, "वे यमन में रहते थे, अच्छी अरबी बोलते थे और इस्लामी दुनिया से गहरी मोहब्बत करते थे।"
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