फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पॉर्नोग्राफिक फिल्म की चोरी पड़ी महंगी

विज्ञापन
विज्ञापन
अमूमन लोग पाइरेटेड मूवी कम खर्च के लिए देखते हैं। लेकिन यह आदत काफी महंगी साबित हो सकती है। कम से कम अमेरिका में तो यही हुआ है।
विज्ञापन


अमेरिका में एक शख्स पर 10 गे-पॉर्न मूवी को बिट टोरेंट वेबसाइट के जरिए शेयर करने का दोषी पाए जाने पर 15 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। इलिनॉय की एक फेडरल अदालत ने इन पॉर्न फिल्मों को बनाने वाली कंपनी निर्माता फ्लावा वर्क्स को प्रति फिल्म 1.5 लाख डॉलर की दर से भुगतान करने का आदेश दिया है। पाइरेसी के मामले में यह सबसे बड़ा हर्जाना माना जा रहा है।

इस मामले में अभियुक्त क्वायन फिशर ने अपने बचाव करने की कोशिश नहीं की, इसलिए भी उन पर भारी जुर्माना लगाया गया। अदालत में फ्लावा वर्क्स ने सबूतों के जरिए यह बताया कि फिशर ही वह शख्स हैं, जो उनकी फिल्मों को पाइरेटेड करके बिट टोरेंट साइट पर अपलोड करते रहे हैं।
विज्ञापन


फ्लावा वर्क्स ने अदालत को बताया कि नकल से बचने के लिए उन लोगों ने अपनी फिल्मों पर एक खास तरह के कोड का इस्तेमाल किया था, जिसे देखने के लिए उपभोक्ताओं को उसे खरीदना होता था। डिजिटल जासूसी के जरिए कंपनी फिशर तक पहुंची। फिशर पहले इन फिल्मों को देखने के लिए फ्लावा वर्क्स के ग्राहक बने। उन्होंने फिल्मों की तय कीमत चुकाई और उसके बाद उसका नकल किया। बिट टोरेंट पर फिल् को अपलोड किए जाने के बाद उसे 3,449 बार डाउनलोड किया गया या देखा गया।

कई मामले खारिज भी हुए हैं
फ्लावा ने अदालत में दावा किया कि फिशर ने कॉपीराइट ऐक्ट का उल्लंघन किया और उपभोक्ता के तौर पर जुड़ने के अनुबंधों का भी उल्लंघन किया। अमेरिकी जज जॉन ली ने फैसला सुनाते हुए कहा कि फ्लावा द्वारा पेश किए गए सबूतों और बचाव पक्ष के नहीं होने के चलते उनके पास फिल्म कंपनी के पक्ष में फैसला लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फिशर फसले के खिलाफ अपील करेंगे या फिर जुर्माना भरेंगे।
विज्ञापन


फिशर उन 15 लोगों में शामिल हैं, जिनमें एडल्ट फिल्म निर्माण कंपनी फ्लावा वर्क्स ने नकल करने का आरोप लगाया। इस मामले में सबूतों के अभाव में बाक़ी सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया। मूवी स्टुडियो, रिकॉर्डिंग कंपनी सहित कई निर्माता अब नकल के खिलाफ नेट, आईपी एड्रेस जैसे सबूतों के सहारे अदालत में पहुंचने लगे हैं। हालांकि इसी साल मई में अमेरिकी फेडरल अदालत ने इनमें से कई मामलों को खारिज करते हुए कहा था कि आईपी एड्रेस किसी व्यक्ति को नकल का दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें