अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद से विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को भी अमेरिका में लोग सड़कों पर उतरे और ट्रंप की जीत का कड़ा विरोध किया। हालात को काबू करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोल तक दागने पड़े। अगर विरोध प्रदर्शन नहीं रुका, तो ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनकी जीत से न सिर्फ लाखों अमेरिकी हैरान हैं, बल्कि उनका यह भी मानना है कि ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति पद के योग्य ही नहीं हैं। अब इन लोगों ने ट्रंप के खिलाफ निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले भी निर्वाचक मंडल अपना फैसला बदल चुका है।
अमेरिका के करीब 30 लाख लोगों ने एक याचिका के जरिए निर्वाचक मंडल से अपील की है कि वे डोनाल्ड ट्रंप की बजाय हिलेरी क्लिंटन को देश का राष्ट्रपति चुने। इस ऑनलाइन याचिका को चेंज डॉट ओआरजी में पोस्ट किया गया है, जिसमें करीब 30 लाख लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसमें मांग की गई है कि निर्वाचक मंडल अपने राज्यों की वोटों को नजरअंदाज कर हिलेरी क्लिंटन के पक्ष में मतदान करें। इनका कहना है कि ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के लायक नहीं हैं। अगर ट्रंप राष्ट्रपति बन गए, तो इतने सारे अमेरिकी नागरिक उनके बलि का बकरा बन जाएंगे। ट्रंप को प्रशासनिक अनुभव का अभाव खतरनाक बना देगा। इसके अलावा उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के कई मामले भी सामने आ चुके हैं।
साल 2000 में डेमोक्रेटिक प्रत्याशी अल गोरे की अमेरिकी चुनाव में जीत हुई थी, लेकिन निर्वाचक मंडल ने जॉर्ज डब्ल्यू बुश को राष्ट्रपति चुना था। निर्वाचक अपनी पार्टी से इतर दूसरी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, जिस पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। हालांकि कई राज्यों में ऐसे निर्वाचकों पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।
इसलिए अहम है निर्वाचक मंडल
अमेरिका में जनता अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति का चुनाव करती है। जनता पहले प्रतिनिधियों को चुनती है, जो निर्वाचक मंडल का गठन करते हैं। इसके बाद निर्वाचक मंडल के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। आमतौर पर ये सदस्य जिस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं, बाद में उसी के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करते हैं। इस बार निर्वाचक मंडल 19 दिसंबर को राष्ट्रपति को चुनेगा। जिसको सबसे ज्यादा सदस्यों को समर्थन मिलेगा, वह अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनेगा।