भारत के साथ शांति वार्ता रद्द करने के बाद पाक ने वार्ता बहाली न करने के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत ने कहा कि भारत वार्ता बहाल करने के लिए आगे नहीं आ रहा है, जिसकी वजह से दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ रहा है।
पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने यूएस आर्मी वॉर कॉलेज की फैकुल्टी और छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल बन गया था, लेकिन इसके बाद भारत की तरफ से बहुत ही हल्की वजहों और अस्वीकार्य पूर्व शर्तें रखने की वजह से वार्ता नहीं हो पाई। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान मिशन की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लोधी के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान के वार्ता के लिए पहल करने के बाद भी भारत इसके लिए आगे नहीं आ रहा है।
लोधी ने कहा कि भारत का यह रवैया दोनों देशों के बीच हालात सामान्य बनाने के प्रयासों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने ने कहा कि आतंकवाद को मात देना, अर्थव्यवस्था को बढ़ाना और पड़ोसी देशों के साथ शांति स्थापित करना और भारत के साथ विवादों का निपटारा करना पाकिस्तान की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक थे। उन्होंने कहा कि यही प्राथमिकताएं हमारी अंतरराष्ट्रीय नीति और विदेश संबंधों का प्रारूप तैयार करती हैं।
लोधी ने कहा कि पाकिस्तान की एक शीर्ष प्राथमिकता यह भी थी कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा कि यह कॉरिडोर पाक को केंद्रीय एशिया और यूरेशियाई भूभाग से जोड़ेगा। उनके मुताबिक इसका लाभ न सिर्फ चीन-पाक को मिलेगा, बल्कि पूरा क्षेत्र इसकी वजह से लाभान्वित होगा।