अमेरिका को आज भी उस रास्ते की तलाश है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान का पूरा सहयोग हासिल हो सके। बार-बार कहने और चेतावनी देने के बावजूद पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कदम नहीं उठाया है। इस स्थिति का जिक्र करते हुए दक्षिण एशिया मामलों के एक वरिष्ठ अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा है कि पाकिस्तान को अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पागलपन वाली कूटनीति की जरूरत है। इसकी मदद से ही उसे आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने को मजबूर किया जा सकता है।
दक्षिण एशिया मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ डेनियल मार्के ने फॉरेन पॉलिसी मैगजीन में लिखा है कि बिल क्लिंटन और बराक ओबामा प्रशासन चाहता था कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनकी चेतावनी के बावजूद पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया, लेकिन ट्रंप ऐसी स्थिति में हैं कि वह पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने को मजबूर कर सकते हैं।
वह पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक नीति अपना सकते हैं और उसे चेतावनी दे सकते हैं कि वह अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे अथवा ...। मार्के ने कहा है कि ट्रंप की पागलपन वाली नीतियां क्लिंटन अथवा ओबामा की चेतावनी की तुलना में पाकिस्तान को डराने में ज्यादा कारगर साबित होंगी।
मार्के के अनुसार ट्रंप पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकते हैं। वह पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए उसके खिलाफ भारत के साथ मिलकर गठबंधन भी बना सकते हैं। ट्रंप पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने का भी फैसला कर सकते हैं। मार्के का कहना है कि ट्रंप अमेरिका के हित में जो भी होगा उसे पूरा करने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी कदम उठा सकते हैं।