भारतीय वायुसेना की सीमापार एयर स्ट्राइक को दूसरे देशों से मिले समर्थन के दबाव में पाकिस्तान भले ही अपने यहां आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा कर रहा है। लेकिन सही मायने में आज तक पाकिस्तान की ऐसी कार्रवाइयां महज दिखावा ही साबित हुई हैं। यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में किया गया है।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परमाणु शक्ति संपन्न भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध का खतरा तब तक बरकरार रहेगा, जब तक अंतरराष्ट्रीय दबाव में इन दोनों के बीच विवाद का कोई स्थायी समाधान नहीं किया जाता। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर अपनी धरती से संचालित हो रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को लेकर दबाव बना हुआ है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के ओप-एड पेज पर ‘जहां परमाणु युद्ध कभी भी संभव है (यह उत्तर कोरिया नहीं है)’ शीर्षक से छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया का ध्यान इस समय उत्तर कोरिया के हथियारों के जखीरे पर लगा हुआ है, लेकिन इसकी वजह से यह तथ्य धुंधला हो रहा है कि परमाणु युद्ध की शुरुआत की संभावना भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष में ज्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने वाला जैश-ए-मोहम्मद अमेरिका की प्रतिबंधित सूची में दर्ज आतंकी संगठन है और औपचारिक तौर पर पाकिस्तान में भी प्रतिबंधित है। लेकिन असल में इस संगठन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संरक्षण और हथियार मिलते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने भले ही अंतरराष्ट्रीय दबाव में विभिन्न आतंकी संगठनों के 121 सदस्यों पर कार्रवाई का दावा किया है, लेकिन वह अपने वादों को कभी नहीं निभाता है।
अगला टकराव और ज्यादा भयानक होगा
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच पिछले सप्ताह हुए संघर्ष के बाद की शांति इसका हल नहीं है। दोनों देशों के बीच अगला टकराव शायद इतनी आसानी से शांत नहीं होगा। दोनों ही देश एक खतरनाक स्तर पार कर चुके हैं। भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया और उधर से भारतीय हवाई सीमा का उल्लंघन किया गया। अगला टकराव सोच से भी ज्यादा भयानक हो सकता है।
कश्मीर मुद्दे का भी किया गया जिक्र
रिपोर्ट में कश्मीर मुद्दे का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि जब तक भारत और पाकिस्तान अपने बीच मुख्य विवाद यानी कश्मीर के भविष्य को निपटाने से इनकार करते रहेंगे, तब तक वे अप्रत्याशित और संभवत: भयानक परिणाम का सामना करते रहेंगे।
चीन पर भी निशाना
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की तरफ से पाकिस्तान के मुख्य सहयोगी और कर्जदाता की भूमिका निभाई जाती है। यदि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की राह फिर से रोकी तो यह पाकिस्तान के लिए संकेत होगा कि वह आतंकी संगठनों को पालना जारी रख सकता है।