अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नई विदेश नीति की घोषणा की है जिसका आधार सहयोगी देशों के साथ 'सामूहिक कार्रवाई' होगा।
वेस्ट पॉइंट, न्यूयॉर्क में अमेरिकी सैन्य अकादमी के स्नातकों को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि अमेरिका को हमेशा दुनिया में नेतृत्व करना चाहिए लेकिन ये नेतृत्व सिर्फ़ सैन्य कार्रवाई के ज़रिए ही नहीं होना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका को अतीत में हुई 'बड़ी ग़लतियों' से बचना होगा।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन और सहयोग से नतीजे पाए जा सकते हैं और हर मुश्किल का हल सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता।
चरमपंथ से लड़ने के लिए कोष
ओबामा ने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा को सबसे सीधा ख़तरा आतंकवाद से है और उन्होंने दुनिया में आतंकवाद से लड़ने के लिए पांच अरब डॉलर के कोष का ऐलान भी किया है।
एक कमज़ोर विदेश नीति के लिए आलोचना का शिकार ओबामा ने यूक्रेन और ईरान में हुई प्रगति की सराहना की।
ये रकम जिन अभियानों के लिए इस्तेमाल की जाएगी उनमें यमन में सुरक्षाबलों का प्रशिक्षण, सोमालिया में अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की मदद, लीबिया में यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षाबलों के प्रशिक्षण और माली में फ्रांस की मदद शामिल हैं।
सीरिया में चल रहे गृह युद्ध के बारे में ओबामा ने राष्ट्रपति असद के विरोधियों की 'मदद बढ़ाने' की बात कही हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि मदद का स्वरूप क्या होगा।
अंतरराष्ट्रीय सहमति पर जोर
बराक ओबामा ने अपने भाषण में ऐसी अमेरिकी विदेश नीति की है जो अंतरराष्ट्रीय सहमति के आधार पर काम करेगी और जिसमें ज़रूरत पड़ने पर ही सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके साथ ही राष्ट्रपति ओबामा की विदेश नीति के कुछ और बिंदुओं पर गौर करें तो आतंकवादी संगठनों को पनाह देने वाले हर देश पर हमला करने वाली नीति टिकाऊ नहीं है।
अमेरिकी सेना की ओर से ड्रोन विमानों का इस्तेमाल जारी रहेगा लेकिन इसमें पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी। ग्वांतानमो में अमेरिकी सैन्य जेल बंद करने के लिए कोशिशें जारी रहेंगी।
अमेरिका को विकास और शिक्षा पर ज़ोर देना जारी रखना चाहिए क्योंकि अमेरिका की ओर से ''किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई बोको हराम जैसे चरमपंथी गुट के ख़तरे को मिटा नहीं सकती। नाइजीरिया में इस्लामी गुट बोको हराम की ओर से अगवा की गई स्कूली छात्राओं को खोजने के लिए एक अभियान में पिछले सप्ताह अमेरिका ने 80 सैनिक भेजे थे।
अगले दस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी विदेश नीति के बारे में कई भाषण देंगे जिसका मक़सद उन आलोचकों को जवाब देना है जो मौजूदा अमेरिकी विदेश नीति को कमज़ोर बताते हैं।