अमेरिकी उद्योग जगत से भारी विरोध के स्वरों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी इतिहास में पहली बार वहां कोयले से चलने वाले बिजली घरों से हो रहे प्रदूषण पर लगाम कसने का ऐलान किया है।
अमेरिकी कांग्रेस में इस तरह के नियंत्रण को लेकर ख़ासा मतभेद रहा है और राष्ट्रपति ओबामा ने इस बार अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए पर्यावरण बचाव एजेंसी को 2015 से पहले इसका खाका तैयार करने का आदेश दिया है।
इस ऐलान के साथ ही कोयले के शेयरों में भारी गिरावट आई है और इस उद्योग से जुड़े गुटों ने इसकी तीखी आलोचना की है। वहीं विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने इसे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली नीति करार दिया है।
पर्यावरणवादी गुटों ने इस घोषणा का स्वागत किया है लेकिन ये भी कहा है कि ये एक छोटा कदम है और अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। अमेरिका में कोयले से चलनेवाले बिजलीघर लगभग चालीस प्रतिशत ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं।
गंभीरता
बराक ओबामा ने कहा है कि उनके इस कदम से दुनिया को एक ठोस संदेश जाएगा कि अमेरिका जलवायु में हो रहे परिवर्तन को रोकने के लिए गंभीर है।
उनका कहना था, "मुझे विश्वास है अमेरिका 21वीं सदी में इस लड़ाई का नेतृत्व कर सकता है लेकिन इसके लिए सबको एकजुट होना होगा।"
"भारत, चीन, ब्राज़ील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी उर्जा ज़रूरतों को नकारा नहीं जा सकता है।"
ओबामा ने कहा, “लेकिन ज़रूरी नहीं है कि वो भी वही ग़लतियां करें जो हम कर चुके हैं।”
अमेरिका में जलवायु परिवर्तन पर जो आम सोच है वो राजनीतिक रूप से बहुत आकर्षक नहीं मानी जाती। सोमवार को पिउ रिसर्च सेंटर की ओर से जारी सर्वेक्षण के अनुसार मात्र चालीस प्रतिशत लोग इसे एक गंभीर समस्या मानते हैं।
राष्ट्रपति ओबमा ने अपनी पहले चुनाव अभियान में मौसम परिवर्तन को एक बड़ा मुद्दा बनाया था लेकिन उनके पहले सत्र में कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने के लिए लाया गया प्रस्ताव विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने पारित नहीं होने दिया था।
अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने कहा है कि इसे लागू करने के लिए वो विशेषाधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन