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उत्तर कोरिया और अमरीका के तनाव में किनकी हुई चांदी

Sun, 25 Mar 2018 03:32 PM IST
बीबीसी हिंदी
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trumph and kim jong un
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के बीच चली बयानबाजियों ने संभावित परमाणु मुठभेड़ को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। साल 2018 की शुरुआत दोनों देशों के नेताओं ने एक-दूसरे को मिटा देने की धमकी से की और एक-दूसरे को ये भी कहा कि किसके पास बड़ा परमाणु बटन है। इस बहस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का माहौल जरूर पैदा कर दिया, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर कोई किसी नुकसान की आशंका से डरा हुआ ही है। ट्रंप और किम की एक-दूसरे को धमकी कुछ लोगों के कान में संगीत का असर भी पैदा कर रही है। ये वो लोग हैं जो परमाणु हथियारों के उत्पादन के धंधे में लगे हैं। साफ लफ्जों में कहें तो ये वो प्राइवेट डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर हैं जो अमरीका के लिए हथियार बनाते हैं।
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परमाणु हथियारों का जखीरा

दिलचस्प बात ये है कि जब-जब अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच तल्ख बयानबाजियां बढ़ती हैं, इन कंपनियों का कारोबार चढ़ने लगता है। इसी साल जनवरी के आखिर में राष्ट्रपति ट्रंप ने 'स्टेट ऑफ़ द यूनियन' भाषण में कहा कि अमरीका अपने परमाणु हथियारों का जखीरा नाटकीय रूप से बढ़ाने जा रहा है।

उन्होंने कहा था, ''अपने बचाव में हमें अपने परमाणु हथियारों का जख़ीरा फिर से तैयार करना होगा। हम उम्मीद करते हैं कि इनका इस्तेमाल कभी नहीं किया जाएगा। लेकिन इसे मज़बूत और ताक़तवर बनाने से ये हम पर होने वाले हमले को रोकने में एक बाधा की तरह काम करेगा।''
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अमरीकी कांग्रेस के बजट ऑफिस के मुताबिक परमाणु हथियारों का जखीरा फिर से तैयार करने में अगले 30 सालों में 1।2 अरब डॉलर का ख़र्च आएगा।

मुनाफे की गारंटी

उत्तर कोरिया और चीन में परमाणु हथियारों का निर्माण सरकार खुद करती है जबकि अमरीका में ये बिजनेस प्राइवेट हाथों में है। जोनाथन किंग मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में प्रोफेसर हैं और वे परमाणु विरोधी गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। उनका कहना है कि ये कंपनियां इतना मुनाफा कमा रही हैं जो दूसरे बिजनेस में नहीं है। प्राइवेट डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को किस तरह से अमरीकी अर्थव्यवस्था में मुनाफे की गारंटी मिली हुई है?इस सवाल पर बीबीसी के रेडियो प्रोग्राम बिज़नेस डेली से बातचीत में जोनाथन किंग ने इसके तीन कारण बताए।

तीन कारण

1. उनके ठेके एकाधिकारवादी हैं। ये बिजनेस चीन, भारत, मेक्सिको या किसी अन्य देश या उद्योग को आउटसोर्स नहीं किए जा सकते।
2. कांग्रेस से मंजूरी के बाद इन कंपनियों को मुनाफे की गारंटी मिल जाती है। इस बात से भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने नाकाबिल हैं। वे शुरुआती बजट से भले ही ज्यादा खर्च कर लें, लेकिन उन्हें आकर्षक मुनाफे की गारंटी तय है।
3.राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इन कंपनियों को ऑडिट में भी छूट हासिल है। हालांकि अर्थव्यवस्था के दूसरे सेक्टरों में काम कर रही कंपनियां इसके लिए हकदार नहीं हैं।

बायोमेडिकल रिसर्च के बराबर का बजट

जानकारों का कहना है कि अमरीका में प्राइवेट डिफेंस इंडस्ट्री को 35 हजार मिलियन डॉलर की रकम दी जाती है। इतनी ही रकम अमरीका में बायोमेडिकल रिसर्च के नाम भी आवंटित की जाती है। लेकिन अगर ये इंडस्ट्री इतनी ही खुफिया तरीके से काम करती है तो इसे मिलने वाली रकम को लेकर पक्के तौर पर कैसे कहा जा सकता है? प्रोफेसर जोनाथन किंग कहते हैं, "ये कंपनियां शेयरहोल्डर्स को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहती हैं, इसलिए वे मुनाफे पर अपनी सालाना रिपोर्ट जारी करती हैं।" हालांकि प्रोफेसर किंग ये भी मानते हैं कि इन कंपनियों के मामले में ये पक्के तौर पर कहना मुश्किल है कि उन्हें कितना मुनाफा परमाणु हथियारों के उत्पादन से हो रहा है और कितना पारंपरिक जरियों से।

हितों का टकराव?

परमाणु प्रसार विरोधी कार्यकर्ता प्रोफेसर किंग डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े एक चौंकानेवाले तथ्य की तरफ ध्यान दिलाते हैं। वो है इस इंडस्ट्री में सेना के पूर्व अफसरों की मौजूदगी। वे कहते हैं, "अमरीका में सेना के अधिकारी प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों से पहले रिटायर हो जाते हैं और इनमें से कुछ को इन कंपनियों में मोटी सैलरी वाली नौकरियों की पेशकश की जाती है।"

"इनके काम करने का तरीका कुछ ऐसा है कि इस बात पर यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है कि इन कंपनियों पर नजर रखी जा रही है। हकीकत तो ये है कि इन कंपनियों पर कोई निगरानी नहीं है।"

लेकिन प्रोफेसर जोनाथन किंग से जनरल (रिटायर्ड) हॉक कार्लिसल इत्तेफाक नहीं रखते हैं। वे अमरीका के नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा, अमरीका के रक्षा विभाग, ऊर्जा विभाग और कांग्रेस कड़ी निगरानी रखते हैं।

नियंत्रण और संतुलन

जनरल (रिटायर्ड) हॉक कार्लिसल ये मानते हैं कि अमरीका में रक्षा उद्योग में एक तरह की ओलिगोपॉली (अल्पाधिकार) वाली स्थिति है जहां कुछ चुनिंदा अमरीकी कंपनियां अपनी सेवाएं मुहैया करा सकती हैं और कुछ हद तक उनके बीच प्रतिस्पर्धा भी होती है। मुनाफे की गारंटी के सवाल पर जनरल (रिटायर्ड) हॉक कार्लिसल का कहना है कि काम ठीक से कहने के लिए उन्हें प्रोत्साहन दिया जाता है और इससे भविष्य के लिए कॉन्ट्रैक्ट भी मिलता रहता है।

हालांकि वे ये नहीं बता पाए कि अतीत में क्या कभी किसी कंपनी से समय पर काम नहीं करने के लिए या फिर शर्ते पूरी नहीं करने के लिए या बजट से बाहर जाकर खर्च करने पर कॉन्ट्रैक्ट छीना गया हो। लेकिन इसके बावजूद जनरल (रिटायर्ड) हॉक कार्लिसल का कहना है कि इस इंडस्ट्री में 'नियंत्रण और संतुलन' की व्यवस्था बनी हुई है और ऐसा नहीं है कि परमाणु उद्योग एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने वाले दोस्तों का क्लब बन गया है।
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