अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता
किम जोंग-उन के बीच ऐतिहासिक मुलाकात को लेकर अब
अमेरिका ने शर्त लगा दी है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप उत्तर कोरियाई नेता से तब तक मुलाकात नहीं करेंगे जब तक कि किम इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं। इस नए बयान के बाद दोनों नेताओं की वार्ता प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
ट्रंप के दफ्तर ने यह शर्त इसलिए लगाई है क्योंकि मुलाकात पर सहमति जताने से किम का इरादा ही मजबूत हो रहा था, जिसकी सभी जगह आलोचना हो रही थी। हालांकि किम का मुलाकात संबंधी आमंत्रण स्वीकार करते वक्त ऐसी किसी शर्त का जिक्र नहीं हुआ था।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा कि यह ट्रंप और किम की मुलाकात तब तक नहीं हो सकती है जब तक कि उत्तर कोरिया ऐसे कुछ ठोस कदम नहीं उठा ले जिनके बारे में उसने पहले से वादा किया हुआ है। हालांकि प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि उत्तर कोरिया को कौन से वादे पूरे करने हैं।
सैंडर्स ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि किम जोंग-उन ने परमाणु हथियारों को छोड़ने और मिसाइल परीक्षण नहीं करने का वादा किया है। इसलिए बैठक के लिए ट्रंप तभी संतुष्ट होंगे जब उत्तर कोरिया की कथनी और करनी में अंतर नहीं होगा।
माना जा रहा है कि ट्रंप द्वारा किम के आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद व्हाइट हाउस ने यह नई शर्त रखी है। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच जारी तनातनी जल्द खत्म नहीं होगी। सैंडर्स ने कहा कि अमेरिका का सैन्य अभ्यास जारी रहेगा क्योंकि उत्तर कोरिया को स्पष्ट होना चाहिए कि हमने उसे कोई रियायत नहीं दी है।
ट्रंप द्वारा किम के आमंत्रण को स्वीकार करने के संदर्भ में व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि संभावनाएं बहुत हैं, लेकिन मैं आपको बता दूं कि राष्ट्रपति ने बैठक का आमंत्रण इस आधार पर स्वीकार किया है कि उत्तर कोरिया ऐसे ठोस कदम उठाएगा जिन्हें प्रमाणित किया जा सके।