दुनिया में पहली बार कोई अंतरिक्ष यान करीब छह हजार डिग्री सेल्सियस तापमान वाले सूर्य से मात्र 61 लाख किमी दूर रहकर एक साल तक उसका चक्कर लगाएगा।
इसके लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा तैयारियां आखिरी चरण में हैं। इसके माध्यम से वैज्ञानिक सूर्य से निकलने वाली किरणों और उनसे पैदा होने वाले सौर आंधी पर शोध करना चाहते हैं। यह यान 6 अगस्त को ‘यूनाइटेड लांच एलायंस डेल्टा-4 हैवी’ में सवार होकर उड़ान भरेगा।
एक कार के आकार के इस अंतरिक्षयान को अमेरिकी वैज्ञानिक यूजीन न्यूमैन पार्कर के नाम पर ‘पार्कर सोलर प्रोब’ नाम दिया गया है। इसे फ्लोरिडा स्थित केप केनवेरल से लांच किया जाएगा। यह अंतरिक्षयान मानव द्वारा अब तक निर्मित किसी भी वस्तु के मुकाबले सूर्य का ज्यादा करीब से अध्ययन करेगा।
‘पार्कर सोलर प्रोब’ अपने साथ विभिन्न उपकरणों को लेकर जा रहा है, जो सूरज का भीतर से और आस-पास या प्रत्यक्ष रूप से अध्ययन करेगा। इन उपकरणों से जुटाए गए डेटा से वैज्ञानिकों को इस सितारे के बारे में बुनियादी सवालों का जवाब देने में मदद मिलेगी। अंतरिक्षयान सूर्य की कक्षा तक 2024 में पहुंचेगा।
नासा के ‘गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर’ के हेलियोफिजिक्स साइंस विभाग के सहयोगी निदेशक एलेक्स यंग ने कहा कि हम कई दशकों से सूरज का अध्ययन कर रहे हैं और अब आखिरकार हमें पता चलेगा कि हम किस हम हद तक सफल हुए हैं। मनुष्य की आंखों को यह भले ही स्थायी गोले की तरह नजर आता हो, लेकिन सूरज एक गतिशील एवं चुंबकीय ढंग से सक्रिय सितारा है।
पिछले के मुकाबले सात गुना ज्यादा करीब होगा यह मिशन
- फोटो : Nasa
इससे पहले सूर्य की सबसे करीबी दूरी से 1976 में हिलियोस-2 नाम का यान गुजरा था। हालांकि, वो भी सूर्य से करीब 4.3 करोड़ किमी की दूरी से निकला था यानी ‘पार्कर सोलर प्रोब’ उसके मुकाबले सूर्य से 7 गुना ज्यादा करीब रहेगा।
यान को 1370 डिग्री सेल्सियस तापमान झेलना होगा
मिशन से जुड़ी वैज्ञानिक निकोला फॉक्स ने बताया कि ‘पार्कर सोलर प्रोब’ को गर्मी और रेडिएशन से बचाने के लिए उसमें कार्बन की बनी हीट शील्ड लगाई गई हैं, जो इसके उपकरणों को गर्म से गर्म तापमान में भी 29 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रख सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सूर्य के इतना करीब अंतरिक्षयान को 1370 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान झेलना पड़ेगा।
- 9 फीट 10 इंच लंबा और 612 किलो भारी है ‘पार्कर सोलर प्रोब’ अंतरिक्षयान
- सात साल में करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होगा
- 7 लाख किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार
- इस रफ्तार से 7 सेकंड में दिल्ली-मुंबई की दूरी तय की जा सकती है
शनि के चंद्रमा पर बड़े गड्ढों में जीवन की सबसे अधिक संभावना
शनि ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा, टाइटन के बड़े गड्ढे इंसानों के रहने के लिए सबसे प्रमुख जगहों में से हो सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, कैसिनी अंतरिक्षयान और ह्यूजेन्स प्रोब से मिली तस्वीरों और आंकड़ों का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने टाइटन की सतह पर जैविक अणुओं को देखने के लिए सबसे अच्छे स्थानों का पता लगाया। इस अध्ययन का नेतृत्व कनाडा के पश्चिमी ओंटारियो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक कैथरीन नीश कर रहे थे।