फिल हॉल एक विमान चालक हैं और अपने जहाज को पूरी दुनियो में उड़ाते हैं।
हॉल बताते हैं कि सबसे लंबी उड़ान जो मैंने भरी है वो साढ़े 28 घंटे लंबी थी।
हम कैलिफोर्निया के ऊपर करीब-करीब नॉर्थ पोल तक उड़े। आर्कटिक के दो चक्कर लगाए और वापस लौट आए।
हालांकि जहाज ने करीब 16,000 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन हॉल केवल बाथरूम और चंद कदमों की दूरी पर रखी कॉफी मशीन तक ही गए।
यह इसलिए है क्योंकि हॉल नासा के चालक रहित विमान (यूएवी) के पायलट हैं। वो एजेंसी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ग्लोबल हॉक ड्रोन को उड़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।
इन रोबोटिक जहाजों को हॉल और उनके सहकर्मी कैलिफोर्निया में एडवर्ग एयर फोर्स बेस में स्थित नासा के ड्राइडेन फ्लाइट रिसर्च सेंटर से ‘चलाते’ हैं।
वैज्ञानिक अभियानों में प्रयोग
यह पायलट एक बड़ी स्क्रीन के सामने बैठ जाते हैं जो उन्हें जहाज के सामने दिखने वाला दृश्य और उससे संबंधित आंकड़े जैसे कि गति, स्थिति, ऊंचाई आदि दिखाती है।
पायलटों का काम जहाज को देखना, कभी-कभार रास्ते में बदलाव या सुधार करना और ये सुनिश्चित करना है कि ये विशालकाय रोबोटिक जहाज अपना पूर्वनियोजित अभियान पूरा कर ले।
यूएवी सामान्यतः सैन्य प्रयोग के लिए जाने जाते हैं लेकिन अब ये नागरिक सेवाओं में भी अपनी जगह बना रहे हैं। एफएए (संघीय उड्डयन प्रशासन) का अनुमान है कि बीस साल से भी कम वक्त में अकेले अमेरिका के आकाश में ही 30,000 ड्रोन होंगे।
नासा इनका इस्तेमाल भूविज्ञान, उड्डयन अभियानों के लिए आंकड़े जुटाने के लिए करता है। नासा 2009 से दो जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है।
तबसे ये प्रशांत महासागर, आर्कटिक के आस-पास और बहुत सी ऐसी जगहों से आंकड़े जुटा चुके हैं, जो नासा द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे दूसरे वैज्ञानिक जहाज़ों के लिए या तो बहुत ख़तरनाक हैं या बहुत दूर।
ग्लोबल हॉक ड्रोन से पहले नासा सैन्य विमान यू2 के नागरिक संस्करण, जिसे ईआर-2 कहते हैं, का इस्तेमाल कर रहा था। हाल कहते हैं कि यू2 की एक समस्या इसकी उड़ान अवधि है।
इसमें सिर्फ एक पायलट होता है जिसे एक बहुत महंगा दबावयुक्त सूट पहनकर जहा़ज में बैठना पड़ता है। वो कहते हैं कि लेकिन इस जहाज को हम जमीन में बैठकर 30 घंटे से ज़्यादा उड़ा सकते हैं।
रॉल्स रॉयस की ताकत
नॉर्थरोप ग्रमन द्वारा बनाया गया ग्लोबल हॉक बल्ब जैसा दिखने वाला जहाज है जो सामान्यतः सेना द्वारा अधिक-ऊंचाई से टोह लेने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।
नासा के पास जो जहाज हैं वो दरअसल अब तक बने पहले और छठे जहाज हैं और ये उस उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं जिसके लिए ये बने हैं।
इनके पंखों की चौड़ाई 35 मीटर या 115 फ़ीट है, जिसका मतलब ये हुआ कि इन्हें बोइंग 737 जितने बड़े हैंगर की ज़रूरत पड़ती है। हांला कि पंखों की चौड़ाई की तुलना में लंबाई कम, सिर्फ़ 13.5 मीटर या 44 फ़ीट है।
अभियान की जरूरत के हिसाब से इन्हें विभिन्न उपकरणों से लैस किया जा सकता है। एक रॉल्स रॉयस जेट इंजन से इन्हें इतनी ताकत मिलती है कि ये 20,000 किलोमीटर (11,000 नॉटिकल मील) तक और 18,000 मीटर (60,000 फीट) की ऊंचाई पर उड़ने की ताकत देता है। इसे मापने, नजर और की निगरानी करने के अभियानों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
असली परीक्षा अगस्त में
इस साल अगस्त में जब तूफानों का मौसम पूरे जोर पर होगा तब ये जहाज अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ान भरेंगे। ग्लोबल हॉक किसी मौसम पद्धति में करीब 15 घंटे तक उड़ान भर सकता है और उसके बाद भी इसके पास वहां पहुंचने और वापस आने लायक वक्त बचेगा।
इससे वैज्ञानिकों को इस प्राकृतिक घटना को देखने का बेमिसाल मौका मिलेगा। हाल कहते हैं, “इसके दौरान हम दरअसल देख सकेंगे कि तूफान में बदलाव कैसे आते हैं। ये हमें ऐसे क्षेत्र में झांकने का मौका देता है जो अब तक संभव नहीं हो सका है।”
भविष्य के इन अभियानों में नासा के दोनों जहाज़ों को इस्तेमाल करने की योजना है। एक तूफान के अंदरूनी भाग पर नजर रखेगा और दूसरा व्यापक पैमाने पर बन रहे हवा के घेरों में छोटे उपकरण गिराकर उन्हें देखेगा।
प्रकृति की पूरी ताकत के सामने परिष्कृत यंत्र का ये मुकाबला इन जहाज़ों की असली परीक्षा होगा। लेकिन इनके पायलटों के लिए ये तो बस ऑफिस का एक दिन और होगा।