वॉयस ऑफ कराची के अध्यक्ष नदीम नुसरत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान सरकार पर हमला बोलते हुए उन्हें पाकिस्तानी सेना का पिट्ठू करार दिया है। उन्होंने खान को एक कमजोर नेता बताते हुए कहा कि वह केवल नीतियां बना सकते हैं लेकिन उन्हें लागू करने और निर्णय लेने का हक देश की सेना के हाथों में है।
नुसरत ने कहा कि शुरूआत से ही पाकिस्तान सैन्य राष्ट्र रहा है।
इमरान खान नीतियों का निर्माण कर सकते हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उन्हें काम करने और उन नीतियों को लागू करने का उचित समय दिया जाएगा। जब उनसे पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने भारत को अनुकूल वातावरण मुहैया करवाने के लिए कहा था। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बहुत सी चीजों के लिए जवाबदेह है। जिसमें आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के नेताओं को मिली छूट भी शामिल है।
नदीम ने कहा, 'पाकिस्तान के लिए दूसरे देशों पर आरोप लगाना तब तक मुश्किल है जब तक वह खुद अपने मसले नहीं सुलझा लेता है। यह दुखद है कि पाकिस्तान भारत को परेशान करने वाला मानता है क्योंकि वह अफगानिस्तान की मदद कर रहा है और उसने इस्लामाबाद पर जासूसी का आरोप लगाया है। पाकिस्तान अफगानिस्तान को अपने से पिछड़ा हुआ मानता है और यह भूल जाता है कि वह एक संप्रभु राष्ट्र है। पाकिस्तान को कराची में 25000 लोगों को मारने, बलोच और सिंधी लोगों का अपहरण करने लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए। ना कि कश्मीर में होने वाले तथाकथित
मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में बात करनी चाहिए। पाकिस्तान को पहले अपने मुद्दे सुलझाने चाहिए।'
नुसरत ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे पहले विश्वास बढ़ाने वाले कार्य किए जाने चाहिए। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध किसी और चीज की तुलना अधिक महत्वपूर्ण हैं। लेकिन पाकिस्तान की सेना और खुफिया विभाग हमेशा ऐसा करते हैं। जब पीएम नरेंद्र मोदी और तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ के बीच बातचीत होनी थी तो पठानकोट घटना हो गई। इसी तरह शरीफ और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच मुलाकात से पहले काबुल में धमाका किया गया। पाकिस्तान का खुफिया विभाग कभी दो देशों के बीच रिश्तों को सुधरने नहीं देगा।'