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बाघों के लिए खतरा बन रहा है मोदी का विकास मॉडल?

Mon, 10 Aug 2015 08:56 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/वाशिंगटन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में औद्योगिक विकास को रफ्तार देना चाहते हैं। इसके लिए वह पूरी दुनिया को मेक इन इंडिया जैसे अभियानों के जरिये न्योता दे रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी विकास की जिस लहर पर सवार होना चाहते हैं, उसके लिए पर्यावरण संरक्षण के नियमों की आहुति दी जा रही है।
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इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है बाघों पर। मोदी सरकार की बांधों के निर्माण और नदियों को मोड़ने व अन्य औद्योगिक परियोजनाओं से बाघों की बढ़ती संख्या पर खतरा मंडराने लगा है।

एशिया में मौजूद बाघों की पूरी संख्या में से तीन चौथाई भारत में हैं। यहां पिछले चार सालों में बाघों की संख्या में 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है और इनकी कुल संख्या 2,226 हो गई है।
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पिछली सरकार की पहल कारगर

इसके लिए पिछली सरकार द्वारा बाघों के संरक्षण के लिए चलाई गई मुहिम जिम्मेदार हैं। जिसके तहत कई ग्रामों को दूसरी जगह बसाया गया, ताकि बाघों को ज्यादा जगह मिल सके।

लेकिन मोदी सरकार बाघों को दी गई इस जगह को औद्योगिक विकास की भेंट चढ़ाना चाहती है। पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश कहते हैं कि अब पर्यावरण संरक्षण की बात करना देश के विकास के खिलाफ माना जा रहा है।

जिस रफ्तार से मोदी सरकार बांध, खनन और औद्योगिक परियोजनाओं को हरी झंडी दे रही है। उससे सिर्फ पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि बाघों के संरक्षण को भी खतरा पैदा हो रहा है।

पर्यावरण कानूनों में बदलाव की मंशा

इस साल के बजट में सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय का बजट जहां 25 फीसदी कम किया। वहीं, बाघ संरक्षण के बजट में भी 15 फीसदी की कटौती की गई है। यही नहीं, औद्योगिक परियोजनाओं की खातिर कड़े पर्यावरण संरक्षण कानूनों में बदलाव करने की तैयारी भी सरकार कर रही है।

सरकार नदी मोड़ने की परियोजना पर काम कर रही है। परियोजना के लागू होने पर इसका असर मध्य प्रदेश के पन्ना टागर रिजर्व पर पड़ेगा। रिजर्व का करीबन एक तिहाई हिस्सा इस परियोजना की भेंट चढ़ जाएगा।

वहीं एमपी के ही पेंच टाइगर रिजर्व के किनारे चार लेन वाली हाईवे बनाए जाने का प्रस्ताव है, जो यहां रहने वाले बाघों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
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चुकानी होगी बड़ी कीमत

सरकार की ब्रह्मपुत्र नदी और इसकी सहायक दिबंग नदी पर 125 से भी ज्यादा बांध बनाने की योजना है। इसमें न सिर्फ जंगल बहेगा, बल्कि इसका खतरा यहां स्थित काजिरंगा नेशनल पार्क पर भी मंडराएगा। जहां 100 से ज्यादा बाघ रहते हैं।

औद्योगिक विकास के लिए अगर पर्यावरण संरक्षण को यूं ही नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में प्रदूषित पानी, हवा और अस्वस्थ जीवन के तौर पर इसकी कीमत चुकानी होगी।
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