चार साल पहले जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे तो लोगों की जितनी नजर बराक ओबामा पर थी उतनी ही सुर्खियां मिशेल ओबामा ने बटोरी थीं।
आज की तारीख में उन्हें राजनीतिक सितारा माना जाता है जो काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। 2008 में जब ओबामा का चुनाव अभियान चल रहा था तो कुछ आलोचकों ने मिशेल को ग़ुस्सैल और कटु करार दिया था।
आलोचकों ने इसके लिए प्रिंस्टन में उनकी जमा की गई थीसिस का हवाला दिया था। इसमें उन्होंने गोरों के बहुमत वाले कॉलेज में काले समुदाय के छात्र होने के असर पर बात की थी। लोगों का कहना था कि नस्ल का मुद्दा उनके दिमाग़ पर हावी है।
पिछले चुनाव प्रचार के दौरान मिशेल ने बयान दिया था, “बड़े होने के बाद पहली बार मुझे अमेरिका पर गर्व हो रहा है।” इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। उन्हें गैर देशभक्त तक कहा गया।
लेकिन फिर मिशेल ने अपना और अपनी छवि का काया कल्प कर लिया। लोगों ने नई मिशेल को देखा जो प्यार करने वाली पत्नी थी, मां थी और बेटी थी।
नकारात्मक थी छवि
बताया जाता है कि शुरू में मिशेल को बराक ओबामा की राजीतिक महत्वाकांक्षा पर ऐतराज था। लेकिन "द ओबामाज" किताब लिखने वाली जोडी कैंटर कहती हैं कि जब मिशेल बराक ओबामा का समर्थन करने का फैसला कर लेती हैं तो वो ओबामा की सबसे बड़ी समर्थक बन जाती हैं।
जोडी बताती हैं, “जो लोग मिशेल को लंबे समय से जानते हैं वो कहते हैं कि मिशेल स्पष्टवादी हैं। वो हावर्ड में ट्रेनिंग प्राप्त वकील हैं। वे अपने पति के तर्कों को सामने रखने में यकीन रखती थीं।”
लेकिन लोगों पर इसका अच्छा असर नहीं हुआ। शायद इसलिए कि आमतौर पर राजनेताओं की पत्नियां हाशिए पर ही रहती हैं और शायद इसलिए भी कि मिशेल के लिए भी ये सब नया था।
छवि जो अमरीका चाहता था
अमेरिका में प्रोफेसर बॉनी डाउ कहती हैं कि 2008 में ये धारणा बनने लगी थी कि मिशेल चुनाव प्रचार में रोड़ा हैं। जब स्पष्ट होने लगा कि मिशेल के कारण नुकसान हो सकता है तो उनकी छवि बदलने का प्रयास शुरू हुआ।
2008 में डेमोक्रेटिक पार्टी के डेनवर में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में मिशेल ने भाषण दिया और कहा कि मैं यहां एक पत्नी, एक मां और एक बेटी के तौर पर खड़ी हूं...बस यहीं से उनकी छवि बदलने लगीद्घ
ओहायो यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कैथरीन जेलीसन कहती हैं कि जिस दिन ओबामा ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी तभी से मिशेल एक ऐसी फर्स्ट लेडी के तौर पर दिखीं जो अमरीका देखना चाहता है- समर्पित पत्नी और मां।
राष्ट्रपति बनने के बाद जहां बराक ओबामा की रेटिंग गिरने लगी वहीं मिशेल की रेटिंग बढ़ती रही। मई 2012 में गैलअप के सर्वे में ओबामा की रेटिंग 52 फीसदी थी तो मिशेल की 60 फीसदी।
हाशिए पर रहना पसंद किया
प्रोफेसर बॉनी डाओ के मुताबिक फर्स्ट लेडी बनने के बाद मिशेल ने बच्चों और परिवारों से जुड़ी योजनाओं को अपनाया। वे व्हाइट हाउस में सब्ज़ियों का बगीचा लगा चुकी हैं, वजन घटाने के फायदे समझाने के लिए रियलिटी टीवी पर आ चुकी हैं और बागबानी पर किताब लिख चुकी हैं।
न्यूजवीक में वरिष्ठ लेखक एलिसन सैम्युल्स कहते हैं, “मिशेल को समझ आ गया था कि व्हाइट हाउस में सब कुछ ओबामा के इर्द गिर्द घूमता है। इसलिए उन्होंने ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना शुरू किया जिससे वे पृष्ठभूमि में ही रहें और ओबामा पर हावी न हों।”
फर्स्ट लेडी होने का विरोधाभास
रिपब्लिकन पार्टी के कई सदस्य भी उनके प्रशंसक हैं हालांकि आलोचक उनके कपड़ों, योजनाओं और विचारों में खामियां निकालते रहे हैं।
पत्रकार और लेखक जोडी कैंटर कहती हैं, “मिशेल ऐसा दिखाती हैं कि वो राजनीति से परे हैं लेकिन सच तो ये है कि वो प्रचार भी करती हैं, चुनाव अभियान के लिए पैसा भी जुटाती हैं, वो सबसे लोकप्रिय राजनीतिक हस्तियों में से एक है।
दरअसल फर्स्ट लेडी होने का विरोधाभास यही है कि वो महिला जितनी ग़ैर राजनीतिक नज़र आती है, राजनीतिक स्तर पर वो उतनी ही प्रभावी साबित होती है।”
विश्लेषकों का कहना है कि लोगों में मिशेल का राजनीतिक आकर्षण अब भी बरकरार है। 2012 के चुनाव प्रचार में भी मिशेल ने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल अपने पति को जीत दिलाने की कोशिश में किया है।