वर्तमान में आप पर लग्नेश की शुभ महादशा चल रही है। कुण्डली में लग्नेश त्रिक भाव में स्थित है। कुण्डली में कालसर्प दोष भी बना है। जिसके कारण आपकी प्रगति एवं शुभ कार्यों में बाधा है। कुण्डली में सप्तमेश अस्त होने एवं सप्तम भाव का नैसर्गिक कारक पाप मध्य होने के कारण विवाह में विलंब है।
ग्रह शान्ति के लिए नित्य मोर पंख दो तीन बार अपने शरीर पर घुमाएं। नित्य श्री गणेश जी की उपासना करें। सवा पांच रत्ती वजन का पन्ना रत्न चांदी में दाहिनी कनिष्ठïका में बुधवार के दिन धारण करें। ऐसा करने पर वर्ष 14 की अन्तिम तिमाही में आपके विवाह की संभावना बनेगी।