प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस की शांगरी-ला डॉयलॉग के दौरान सिंगापुर में हुई मुलाकात के बाद पेंटागन ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों को बनाए रखने के संकल्प को दोहराया। इस बीच मैटिस ने बड़े कर्जों के बारे में बोलने के लिए प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि मोदी ने उन कर्जों को स्वीकृति देने के खतरे के बारे में एक अच्छा कदम उठाया है जो ‘वास्तव में दिखने में बहुत अच्छे होते हैं।’
बता दें कि शनिवार को मोदी ने सिंगापुर में शांगरी-ला शिखर वार्ता को संबोधित किया था। इस दौरान मैटिस ने मोदी के साथ कार्यक्रम से इतर बातचीत की थी। शांगरी-ला बैठक से वापस अमेरिका लौटते वक्त अमेरिकी रक्षामंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘उन्होंने (मोदी ने) उन ऋणों को स्वीकार करने के खतरों के बारे में अच्छे बिंदु उठाए जो वास्तव में सच होने चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ‘मुझे मोदी का वह भाषण याद है। ऐसा लग रहा था जैसे मैं पुराने समय के व्यक्ति को सुन रहा हूं। मुझे लगा वह बहुत महान हैं। मुझे बड़े कर्ज के बारे में उनकी बात पसंद आई।’
मैटिस ने कहा, ‘बड़ा कर्ज.. और मैं अपने कमरे में वापस जाने के बाद रात में उसके बारे में सोच रहा था कि आप बेनेट राइफल से लैस एक सैनिक के मुकाबले कर्ज से अपनी संप्रभुता और आजादी ज्यादा आसानी सेे गंवा सकते हैं। आप आर्थिक रूप से इसे गंवा सकते हैं।’
बता दें कि मोदी ने उन सरकारों की आलोचना की थी जो दूसरे देशों को ऐसे कर्ज के बोझ तले दबा देते हैं जिन्हें चुका पाना असंभव होता है। इसके लिए उन्होंने विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यवहार और उसकी बीआरआई जैसी परियोजनाओं का जिक्र भी किया जिसमें दूसरे देशों को कर्ज देना शामिल है।