राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से ही अमेरिकी प्रशासन ने वीजा नियम को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। अपने H-1B जैसे वर्किंग वीजा को ग्रीन कार्ड में बदलने की सोच रहे भारतीयों को अब एक और मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। 1 अक्तूबर से अमेरिकी नागरिक और आव्रजन सेवा ने इस तरह के मामलों में इन-पर्सन इंटरव्यू को अनिवार्य कर दिया है।
इस बात की घोषणा प्रशासन ने 28 अगस्त को कर दी थी। वहीं दूसरी ओर अमेरिका इमिग्रेशन अटॉर्नी यूएससीआईएस द्वारा जारी किए गए रिकवेस्ट फॉर एविडेंस की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल 2017 से पहले फाइल की गई रिकवेस्ट 1 अक्तूबर 2017 से एच-1बी वीजा से वैध होंगी।
पढ़ें: एच-1बी वीजा: अमेरिका में अधर में लटके भारतीय कर्मचारी
एनपीजेड लॉ ग्रुप के मैनेजिंग अटॉर्नी डेविड एच ने बताया कि यूएससीआईएस अभी पूरे परिवार पर आधारीत ग्रीन कार्ड के लिए इंटरव्यू लेता है। लेकिन ज्यादातर समय, उच्च श्रेणी के आवेदकों को इंटरव्यू में छूट दे दी जाती है। जबकि पिछले एक दशक से वर्किंग वीजा को ग्रीन कार्ड में बदलने के लिए साक्षात्कार एक स्टैंडर्ड है।
गौरतलब है कि यह साल अमेरिका जाने के वीजा आवेदन करने वालों में भारतीयों की संख्या काफी ज्यादा है। अमेरिका के इस वित्तीय वर्ष में सबसे ज्यादा भारतीयों ने एच-1बी वीजा के लिए अप्लाई किया है। बीते के 9 महीनों में 2.47 भारतीयों ने एच-1बी वीजा के लिए आवेदन किया है। अक्तूबर 2016 से लेकर जून 2017 तक एच-1बी वीजा के लिए अप्लाई करने वालों में 74 फीसदी भारतीय है।
बता दें कि अमेरिका में वित्तीय वर्ष 1 अक्तूबर से शुरू होता है। 2015-2016 वित्तीय वर्ष के बीच तीन लाख भारतीयों ने वीजा के लिए आवेदन किया था। भारतीयों के मुकाबले में चीन से बहुत ही कम आवेदन इस बार आए हैं। 2015-2016 वित्तीय वर्ष में 35,720 चीनी नागरिकों ने आवेदन किए थे।