109 अपराधियों को ही इस दौरान भारत में दी गई मौत की सजा
51 को हत्या और 43 को महिलाओं से यौन हिंसा में मिला मृत्युदंड
02 अपराधियों को पहली बार नशीली दवाओं से जुड़े अपराध में मौत की सजा
136 अपराधियों को 2016 में मौत की सजा मिली थी भारत में
87 अपराधी 2016 में हत्या के मामलों में मौत की सजा पाने वालों में थे
371 अपराधी भारत में 2017 के अंत तक फांसी की सजा के बाद जेलों में बंद थे
(एमनेस्टी रिपोर्ट में राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय के मौत की सजा पर शोध विभाग के आंकड़े)
2591 अपराधियों को 2017 में पूरी दुनिया में मौत की सजा मिली
3117 अपराधियों को 2016 में मिला था दुनिया भर में मृत्युदंड
02 लगातार साल हो गए हैं जब भारत में एक को भी फांसी नहीं मिली
993 को ही फांसी चढ़ाया गया पिछले साल पूरी दुनिया में
09 एशिया पैसेफिक क्षेत्र के देशों में फांसी का आंकड़ा 11 से भी कम रहा
02 देशों ताइवान व इंडोनेशिया में भी 2017 में किसी को फांसी नहीं मिली
04 फीसदी कम रही 2017 में फांसी चढ़ने वालों की संख्या 2016 के मुकाबले
1032 अपराधी फांसी पर चढ़ाए गए थे 2016 में पूरी दुनिया में
1634 फांसी वाले वर्ष 2015 के मुकाबले 39 फीसद घटा 2017 का आंकड़ा
1989 के बाद सबसे ज्यादा फांसी दी गई थी दुनिया में 2015 में
एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इस रिपोर्ट में चीन के आंकड़े शामिल नहीं है, जहां संस्था का विश्वास है कि सत्ता विरोध पर हजारों लोगों को मौत की सजा सुनाकर जेल भेज देने और हजारों को फांसी चढ़ाए जाने की खबरें आती हैं। लेकिन चीन सरकार ने आंकड़ों को गुप्त कर रखा है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत भारत, सिंगापुर और थाईलैंड ने हाईजैकिंग, परमाणु आतंक और भ्रष्टाचार पर मौत की सजा के नए कानूनों को स्वीकार कर मृत्युदंड की स्थिति को बढ़ाया है।