भारतीय अमेरिकी लेखक अपर्णा पांडे की किताब 'चाणक्य टू मोदी: द इवोल्यूसन ऑफ इंडियन फॉरन पॉलिसी' चर्चा में है। किताब के मुताबिक ब्रिटिश नियमों द्वारा डिजाइन की गई ब्यूरोक्रेसी और संस्थानों ने भारत को नई वैश्विक व्यवस्था में बहाल करने के लिए एक चुनौती निभाई है।
वाशिंगटन डीसी से अपर्णा पांडे की किताब के मुताबिक भारत के नौकरशाहों ने उन्हीं स्थितियों को अपनाया जो पहले से चलन में थी। भले ही भारत के लोग नई वैश्विक व्यवस्था के हिस्से के रूप में इक्कीसवीं शताब्दी में प्रवेश करना चाहते हों।
अमेरिका के थिंक टैंक माने जाने वाले हडसन इंस्टीट्यूट से पांडे ने लिखा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने चुनाव के बाद से एक नए दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। उन्होंने चीजों को बदलने की इच्छा का प्रदर्शन किया और वह नेटवर्क का निर्माण कर रहे हैं, जो बदलाव लाएगा।
किताब के मुताबिक नागरिक सेवा और सशस्त्र बलों सहित ब्रिटिशों द्वारा बनाई गई प्रशासन की संस्थाओं को पहले से निर्धारित पैरामीटर के भीतर सोचने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। जबकि नेहरू से लेकर मोदी तक के नेताओं ने भारत को अपनी प्रतिष्ठा को बहाल करने का वादा किया।
अपर्णा ने कहा कि भारत सभी मामलों में एक बेहतर देश है। पांडे ने हार्पर कॉलिंग्स द्वारा प्रकाशित 200 पेज की किताब में लिखा- हांलाकि पिछले सत्तर सालों के अनुभव से यही पता चलता है कि भारत के नेताओं द्वारा परिकल्पना की गई महानता को औपनिवेशिक उद्यम बनाए रखने के लिए संस्थानों द्वारा अमल करने के लिए बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब भारत में राजनीति बहुत लंबे समय से हो रही है, तब भी सरकारों को यह लगता है कि उन्हें राजनीतिक पहचान के लिए अपील करने की जरूरत है। और उनके आर्थिक सुधार से वो चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं।