राजलक्ष्मी ने इस तकनीक के लिए चमगादड़ों द्वारा काम में लाई जाने वाली प्रणाली का इस्तेमाल किया। दरअसल, चमगादड़ अंधेरे में सोनार तकनीक का उपयोग करते हैं। इसमें वे ध्वनिक सिग्नल भेजकर परावर्तित प्रतिबिंबों के आधार पर वस्तुओं की पहचान करते हैं। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, राजलक्ष्मी द्वारा विकसित की गई प्रणाली, फोन के स्पीकर से अश्रव्य ध्वनि संकेतों को प्रसारित करती है। फिर मानव शरीर से परावर्तित प्रतिबिंबों को ट्रैक करके इनका विश्लेषण करने के बाद परिणाम देती है।
‘मैं फिजियोलॉजिकल सिग्नल्स का पता लगाने के तरीकों के बारे में पता लगाना चाहती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये हेल्थकेयर एप्लीकेशन के लिए सबसे ज्याद इस्तेमाल किए जाने वाले सिग्नल हैं।’
- राजलक्ष्मी नंदकुमार