भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां सोमवार को अपने जापानी और भारतीय समकक्षों के साथ त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान तीनों नेताओं ने नेविगेशन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही डोकलाम संकट और चीनी के बदले रवैये पर भी चर्चा की गई।
यहां संयुक्त राष्ट्र आम अधिवेशन से इतर तीनों शीर्ष नेता- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और जापान के विदेश मंत्री टारो कोनो ने समुद्री सुरक्षा, संपर्क और प्रसार के मसले पर भी अपने विचार आदान-प्रदान किए।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने नेविगेशन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और विवादों के शांतिपूर्ण हल सुनिश्चित करने की आवश्यकताओं पर जोर दिया। दक्षिण चीन सागहर और पूर्वी चीन सागर पर क्षेत्रीय विवाद पर भी तीनों देशों ने चर्चा की।
चीन दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। बहरहाल, वियतनाम, मलयेशिया, फिलीपींस, ब्रुनेई और ताइवान चीन के दावे को सही नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि दक्षिण चीन सागर पर हमारा भी दावा भी बनता है। स्वराज ने उत्तर कोरिया के परमाणु मिसाइल परीक्षणों के मसलों को भी उठाया, जो लगातार न केवल कोरियाई प्रायद्वीप, जापान और अमेरिका के लिए खतरा बनता जा रहा है।