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दुनिया का पहला एटम बम बनाने में था लड़कियों का महत्वपूर्ण योगदान

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साल 1945, तारीख 16 जुलाई, समय 5 बजकर 29 मिनट और 45 सेकेंड। यही वो समय था जब अमेरिकी रेगिस्तान में एक जोरदार धमाका हुआ। धुएं का ऐसा विशालकाय गुबार पैदा हुआ जो सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दिखाई पड़ा। ये एक ऐसा धमाका था जिसने दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया। अमेरिका दुनिया का पहला परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया। न्यू मैक्सिको में दुनिया का पहला परमाणु परिक्षण सफल साबित हुआ था। लेकिन अभी ये जानकारी शीर्ष वैज्ञानिकों और प्रशासकों तक ही सीमित थी और अमेरिकी जनता को इस सफलता की जानकारी 6 अगस्त को हिरोशिमा पर बम गिराए जाने से ही मिली।
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जे रॉबर्ट हाइयमर और वेनेवर बुश जैसे तमाम पुरुष वैज्ञानिकों को इस सफलता का श्रेय मिला। तस्वीरों से लेकर अखबारों में पुरुष ही छाए रहे। ये वो दौर था जब परमाणु विज्ञान और सैन्य अभियानों को आमतौर पर पुरुषों का क्षेत्र समझा जाता था। लेकिन इसी दौर में 18 साल की लड़कियों से लेकर 50 साल की महिला वैज्ञानिकों ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। ऐसी ही एक कहानी है रूथ हडलसन की, जिन्होंने 18 साल की उम्र में इस मैनहट्टन परियोजना की ओक रिज यूनिट में काम करना शुरू किया था। आधिकारिक रूप से इस जगह को क्लिंटन इंजीनियरिंग वर्क्स कहा जाता था। 59 हजार एकड़ में फैली ये यूनिट एक बेहद खुफिया जगह थी।

हडलसन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा, "वहां कोई एक दूसरे से कोई सवाल नहीं पूछता था। हम क्या कर रहे हैं, और क्या करते हैं क्योंकि हमें नहीं मालूम था कि कौन देख और सुन रहा है। हमें पूरे दिन स्टूल पर बैठे रहते, नॉब्स को बैलेंस करते रहते, हमसे नहीं होता तो सुपरवाइजर को बुलाकर बैलेंस करवाते और काम करते रहते। हमें बस ये बताया गया कि हम युद्ध जीतने में मदद कर रहे हैं।" इस पूरी यूनिट में बड़े-बड़े होर्डिंगों पर जानकारी को छुपाकर देश सेवा करने की बातें लिखी हुआ करती थीं। कई महिलाओं को क्लर्क, सेक्रेटरी से लेकर एक दूसरे पर जासूसी करने का काम मिलने की बातें सामने आती हैं।
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रूथ हडलसन - फोटो : BBC
महिला वैज्ञानिक रूथ ह्यूज होव्स ने अपनी किताब 'देयर डे इन सन - विमेन ऑफ मैनहट्टन प्रोजेक्ट' में ऐसी महिलाओं का जिक्र किया है। वे लिखती हैं, "मैनहट्टन परियोजना में काम करने वाली सभी महिलाएं वैज्ञानिक नहीं थीं। वे ट्रक ड्राइवर, स्विचबोर्ड ऑपरेटर, सेक्रेटरी और क्लर्क थीं। एक महिला तो ऐसी भी थीं जिन्होंने परमाणु परिक्षण की साइट पर 5 टन के ट्रक को चलाया। कई महिलाएं जिन्हें सेक्रेटरी कहा जाता था, उन्हें ऊंचे स्तर की सिक्योरिटी क्लियरेंस मिली हुई थी और उनके ऊपर भारी प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी थीं।" होव्स की किताब एक ऐसी महिला वैज्ञानिक की कहानी बयां करती हैं जिन्होंने इस प्रोजेक्ट में काम करने के लिए अपने गर्भवती होने की बात को छुपाए रखा।

होव्स लिखती हैं, "वैज्ञानिक फर्मी की टीम की सदस्य लिओना वुड्स ने 1943 में भौतिक वैज्ञानिर जॉन मार्शल से शादी की लेकिन इसके बाद भी न्यूट्रॉन्स पर शोध जारी रखा। लियोना ने डेनिम जैकेट और ओवरऑल ड्रेस की मदद से प्रेगनेंसी की बात छुपाए रखी और बच्चे के जन्म से दो दिन पहले तक काम करती रहीं।" होव्स अपनी किताब में एक दिलचस्प किस्सा बयां करती हैं जब प्रसिद्ध वैज्ञानिक एनरिको फर्मी को अपनी समस्या के लिए एक चीनी महिला वैज्ञानिक महिला वैज्ञानिक शीन शिंग वू से मदद मांगनी पड़ी।

वे लिखती हैं, "साल 1942 में प्रोजेक्ट की शिकागो इकाई में लार्ज-स्केल प्लुटोनियम प्रोडक्शन रिएक्टर ने शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही काम करना बंद कर दिया। फर्मी को शक हुआ कि कोई फिजन प्रोडक्ट है जो रिएक्टर में चेन रिएक्शन के दौरान ज्यादा मात्रा में न्यूट्रॉन्स को कैप्चर कर रहा है। इसके बाद फर्मी को इस बारे में "आस्क मिस वू" कहते सुना गया। इसके बाद फर्मी के फोन करने पर वू ने जेनन आइसोटाइप XE-137 की मौजूदगी के बारे में बताकर समस्या का पता लगा लिया।"
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महिला वैज्ञानिक - फोटो : BBC
अमेरिकी पत्रकार डेनिस कीरमैन ने भी अपनी किताब 'गर्ल्स ऑफ एटोमिक सिटी' में ऐसी युवा महिलाओं की दास्तां बयां की है जिन्होंने बिना कुछ जाने तीन सालों तक ओक रिज यूनिट में दिन रात काम किया।

वे एक ऐसी ही 24 साल की महिला सेलिया के बारे में लिखती हैं, "वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में काम करने के बाद सेलिया को प्रोटोकॉल और सिक्योरिटी क्लियरेंस की समझ थी। लेकिन ओक रिज में एक अलग ही स्तर की सुरक्षा व्यवस्था थी।"

हडलसन 6 अगस्त, 1945 के दिन को याद करते हुए कहती हैं, "हमें बताया गया कि बम गिरा दिया गया है और इसमें हमारा भी योगदान है। मैं शुरू में बेहद खुश थी लेकिन बाद में जब पता चला कि इतने लोगों को मारने में मेरा योगदान है तो खुशी गायब हो गई। इसने मुझे बेहद परेशान किया और आज भी करता है कि इसमें मैंने भी काम किया लेकिन मुझे उस बारे में पता नहीं था।" हडलसन कहती हैं, "ओक रिज वाई 12 यूनिट में काम करते हुए मैंने जाना कि महिलाएं खुफिया जानकारियों को बचाए रख सकती हैं। हमनें सच में कर दिखाया और शानदार काम किया और हम सब महिलाएं ही थीं।"
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