अमेरिकी शहर बाल्टीमोर के ठीक बाहर गिलक्रिस्ट सेंटर में मरीज़ों के लिए 34 बिस्तर हैं और यहाँ लगभग हर सप्ताह 30 लोगों की मौत हो जाती है।
इस केंद्र को चलाने का ज़िम्मा है दो जुड़वाँ बहनों टीना मागियो और गीना मागियो पर। सेंटर में हर दिन होने वाली मौतों के बावजूद दोनों बहनें उन लोगों से मिलने आती हैं, जो मृत्यु शय्या पर हैं।
इन केंद्रों को इसीलिए बनाया गया है ताकि अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे बुज़ुर्ग अपनी ज़िंदगी के शेष पलों को सूकून के साथ बिता सकें।
गिलक्रिस्ट सेंटर में भर्ती सभी मरीज़ हर दिन इन नर्स बहनों से मिलने के लिए बेताब रहते हैं।
शायद इसलिए क्योंकि ऐसे वक्त में जब अपने भी इन उम्रदराज़ लोगों का साथ छोड़ जाते हैं, टीना और गीना इनके लिए हमेशा मौजूद रहती है। ये दोनों न सिर्फ संवेदना बल्कि उनका हौसला भी बढ़ाती रहती हैं।
मौत का इंतज़ार
दोनों बहनें अलग-अलग शिफ्टों में काम करती हैं और मरीज़ों के लिए वे सिर्फ एक नर्स नहीं हैं- वे उनका हर पल ख्याल रखती हैं।
अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका की जनसंख्या का 12।4% हिस्सा 65 साल की उम्र से अधिक वाले वरिष्ठ नागरिकों का है।
ये आंकड़ा 2030 तक 19% तक बढ़ने की उम्मीद है। इस तरह के केंद्रों में वो लोग भर्ती होते हैं, जिनकी जीवन अवधि छह महीने या उससे भी कम है।
अगर इस रफ्तार से बुजुर्ग बढ़े तो इस तरह के देखभाल केंद्रों की जरुरत भी शायद और बढ़ जाएगी।
टीना और गीना का कहना है कि हालांकि ऐसे लोग जिन्हें हर दिन बीमारी और मौत का सामना करना पड़ता है, उन्हें न सिर्फ सहानुभूति की ज़रुरत है बल्कि शेष दिनों को यादगार तरीके से जीने की भी है।
इन जुड़वाँ बहनों का कहना है कि उनका काम मरीज़ों के जीवन के शेष पलों को सुखद बनाना है।