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हेडली और राणा को जनवरी में होगी सजा

Thu, 29 Nov 2012 10:44 AM IST
बीबीसी हिंदी
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मुंबई में 26 नवंबर को हुए हमले में शामिल होने के आरोप में लश्कर-ए-तैबा चरमपंथी डेविड कोलमैन हेडली को 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। जबकि हेडली के साथी तहव्वुर राणा को 15 जनवरी, 2013 को सजा सुनाई जाएगी।
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अमेरिका में शिकागो की एक अदालत ने पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक हेडली के बारे में ये फ़ैसला किया है। हेडली को 26/11 मुंबई हमलों में शामिल होने का दोषी पहले ही क़रार दिया जा चुका है। तहव्वुर राणा को पहले चार दिसंबर, 2012 को सजा सुनाई जानी थी।

शिकागो अदालत के प्रवक्ता रैनडल सैमबॉर्न ने कहा कि शिकागो ज़िला न्यायधीश हैरी लेनिनवेबर दोनों को मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल होने और डेनमार्क के एक अख़बार पर हमला करने की योजना बनाने के लिए सजा सुनाएंगे।
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रैंडल का कहना था, ''राणा की सजा की घोषणा की तारीख़ में बदलाव किया गया है। उन्हें अब चार दिसंबर, 2012 की बजाए 15 जनवरी, 2013 को सजा सुनाई जाएगी। उन दोनों को सजा सुनाए जाने संबंधी सुनवाई डिर्कसेन संघीय अदालत के ज़िला न्यायाधीश हैरी लेनिनवेबर के समक्ष सुबह नौ बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी।''

52 वर्षीय हेडली ने चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा के लिए मुंबई हमलों के दौरान निशाना बनाए गए सभी ठिकानों की रेकी की थी, यानी उन्होंने पहले जाकर उस योजना के कारगर होने का जायज़ा लिया था।

मुंबई हमला
भारत ये कहता रहा है कि पाकिस्तान की धरती से सक्रिय लश्कर-ए-तैबा ने ही मुंबई हमलों को अंजाम दिया था।
अमेरिकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने इस केस की छानबीन के दौरान हेडली पर जो आरोप लगाए थे, हेडली ने अदालत में मुक़दमे की सुनवाई के दौरान उन सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था।

हेडली को भारत में सार्वजनिक स्थानों पर बम हमलों की साज़िश रचने और भारत में अमेरीकी नागरिकों की हत्या से संबंधित छह आरोपों में सजा-ए-मौत मिल सकती थी, लेकिन उसने एफ़बीआई के साथ सजा में छूट संबंधी समझौता कर लिया।

इस समझौते के तहत हेडनी ने जांच में सहयोग करने और सरकारी गवाह बनने की बात स्वीकार की थी। राणा को जूरी ने 10 जून, 2011 को दोषी ठहराया था।

हेडली के साथी तहव्वुर राणा पर भी मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल होने और डेनमार्क के एक अख़बार पर हमले की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल होने के आरोप से उन्हें बरी कर दिया गया था जबकि अदालत ने उन्हें डेनमार्क के अख़बार पर हमला की योजना बनाने का दोषी क़रार दिया था।
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