पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने दुनिया के सामने पाकिस्तानी सेना की पोल खोल कर रख दी है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान सेना अफगानिस्तान में जानबूझकर आग लगाने वाले अपराधी का काम कर रही है जबकि दुनिया के सामने वह वहां ‘फायर ब्रिगेड’ का हिस्सा भी बनना चाहती है। इसका मतलब है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना की भूमिका ‘चोर बनना चाहे कोतवाल’ सरीखी है।
अमेरिका में पाक के पूर्व राजदूत रहे हुसैन हक्कानी की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका की तरफ से अफगानिस्तान मसले पर पाकिस्तान के सहयोग पर संदेह प्रकट किया जा रहा है। इसके साथ ही कई अमेरिकी विशेषज्ञ पाक के सरकारी फैसलों में सेना की भूमिका का खुले तौर पर उल्लेख कर चुके हैं। हक्कानी के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान में पहले आग लगाती है और फिर बाद में उसे बुझाने वाले का काम करते हुए भी दिखना चाहती है।
उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के दौरान पाक सहयोगी तो था लेकिन उसका मुख्य मकसद भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करने को लेकर था। उसने अमेरिकी परिप्रेक्ष्य के लिहाज से सहयोगी की भूमिका नहीं निभाई थी। इसी वजह से क्षेत्र में अमेरिकी और पाकिस्तानी हित मेल नहीं खाते हैं।
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पूर्व पाक राजनयिक ने कहा कि अमेरिका, अफगानिस्तान में मजबूत और स्थिर सरकार देखना चाहता है, लेकिन इसमें तालिबान हर रोज अड़ंगा डाल रहा है। उल्लेखनीय है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के मामले में पिछले कुछ समय से अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उसने पाक पर आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना देने का आरोप भी लगाया है। अब जबकि हक्कानी ने खुद कहा है कि अफगानिस्तान में आगजनी पाकिस्तानी सेना की उपज है। ऐसे में अमेरिकी संदेह और गहरा हो सकता है।