प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना
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90 हजार सड़कों की जांच
शोधकर्ताओं ने ठेकेदारों के बाद इस योजना के तहत बनाई गई 90 हजार सड़कों से संबंधित आंकड़ों की जांच की। उन्हें पता चला कि जिन सड़कों का कभी निर्माण ही नहीं हुआ, उनमें से ज्यादातर ठेके राजनीतिक दबदबा रखने वाले ठेकेदारों को दिए गए थे।
नौकरशाहों की मिलीभगत की आशंका
हालांकि इस योजना में सड़कों और ठेकेदारों के चयन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कोई भूमिका नहीं थी। ये सारे निर्णय नौकरशाही को लेना था। ऐसे में सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार कैसे हुआ? इसके जवाब में शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों में जातीय और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर नजदीकी संबंध कायम हो जाते हैं।
इन्हीं संबंधों का फायदा उठाकर जनप्रतिनिधियों ने अपने खास लोगों को ये ठेक दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। शोधकर्ताओं के अनुसार चुनाव जीतने वाले राजनेता और नौकरशाह का सरनेम एक होने पर योजना में भ्रष्टाचार की संभावना ज्यादा पाई गई।