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एफबीआई ने कैलिफोर्निया के जांच का दायरा पाक तक बढ़ाया

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अमेरिका के कैलिफोर्निया में पाकिस्तानी महिला तसफीन मलिक और उसके पति सईद रिजवान फारूक की ओर से की गई गोलीबारी की जांच कर रही फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (एफबीआई) ने अपने जांच का दायरा पाकिस्तान और अन्य देशों तक बढ़ा दिया है। इसमें 14 लोगों की जान चली गई थी। अमेरिका में कट्टरता बढ़ने की चिंता को लेकर इसके जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
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अमेरिकी अटॉर्नी जनरल लोरेट्टा लिंच ने बताया कि जांच के दायरे में पाकिस्तान समेत अन्य देश शामिल हैं। इस संबंध में अमेरिकी अधिकारी सऊदी अरब के अधिकारियों से भी बातचीत कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे आतंकी वारदात करार दिया है। एक सवाल के जवाब में लिंच ने कहा कि मामले की व्यापक स्तर पर जांच चल रही है। यह बेहद जटिल है।

इसके कट्टरपंथ से जुड़े होने के संकेत मिलने से एफबीआई जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यह आतंकी जांच है। लिंच ने बताया कि इस संबंध में राज्य और स्थानीय समकक्षों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इसके अलावा एटीएफ मार्शल की भी मदद ली जा रही है।
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मदरसे में तसफीन ने ली थी ट्रेनिंग

उन्होंने बताया कि तसफीन और फारूक ने सऊदी अरब में करीब दो साल पहले शादी किया था। शुरुआत में दोनों एक मैट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिए एक दूसरे के संपर्क में आए थे। तसफीन ने अमेरिका आने से पहले पाकिस्तान में पढ़ाई पूरी की।

अमेरिकी अटॉर्नी ने बताया कि इस घटना के बाद जांच अधिकारियों ने 300 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की और कई जगह तलाशी ली। हालांकि तसफीन और फारूक की ओर से गोलीबारी करने की वजह का पता नहीं चल सका है।

पाकिस्तान के एक मदरसे के मौलवी ने सोमवार को बताया कि तसफीन ने पाक के मुल्तान स्थित अल-हुदा इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ली थी। मदरसे में तसफीन का नाम मुकद्दस रखा गया था। उसने पाकिस्तान के हाई प्रोफाइल धार्मिक सेमीनारों में भी हिस्सा लिया था। 1994 में स्थापित यह मदरसा सिर्फ महिलाओं के लिए है, जो मध्यम वर्ग की महिलाओं को निशाना बनाता है।

इसकी शाखाएं अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन में भी हैं। तालिबान से विचारधारा मेल खाने की वजह से यह मदरसा विवादों में भी घिर चुका है। बहाउद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी में उसके साथ पढ़ने वाले बताते हैं कि तसफीन 2007 से 2012 तक यूनिवर्सिटी के बाद नियमित रूप से मदरसा जाती थी।
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