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शोहरत बन सकती है जान की आफत!

Sun, 21 Apr 2013 03:15 PM IST
बीबीसी हिंदी
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हो सकता है कि आप अपने पेशेवर ज़िदगी में बहुत कामयाब हों। लोग आपके शानदार करियर को देखकर जलते भी हों। लेकिन शायद बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि लोगों की शोहरत जानलेवा भी हो सकती है।
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अमेरिका के एक अख़बार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ मृत्यु के बाद लोगों के बारे में लिखे जाने वाले विश्लेषण के आधार पर ये आकलन किए गए हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार फ़िल्मी सितारे और खिलाड़ी दूसरे कामयाब लोगों की तुलना में कम उम्र में मर जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने हालांकि इस बात को स्वीकार किया है कि इस आकलन के आधार पर निर्णायक तौर पर कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन बावजूद इसके इस रिपोर्ट से ऐसी बहुत सी रोचक बातें सामने आईं हैं।

क्यूजेएम नाम के एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में ये शोध छपा है।

ऑस्ट्रेलिया की क्यून्सलैंड यूनिवर्सिटी और न्यूसाउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने साल 2009 से लेकर 2011 के बीच न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार में एक हज़ार लोगों की मौत के बाद छपी रिपोर्टों का विश्लेषण किया।
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शोध से पता चला कि फ़िल्म अभिनेता, गायक, संगीतकार, खिलाड़ी वगैरह की औसतन 77 साल की उम्र में मौत हुई जो कि दूसरे मरने वालों की तुलना में सबसे कम उम्र के थे।

रिपोर्ट में पाया गया कि लेखक, चित्रकार वगैरह 79 साल में मरे। इतिहासकार और अर्थशास्त्री 82 साल तक जीवित रहे, जबकि व्यापार और राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय लोग 83 साल की उम्र में मरे।

सफलता की क़ीमत
प्रोफ़ेसर रिचर्ड एप्सटिन का कहना था, इससे कुछ भी साबित नहीं होता लेकिन इतना ज़रूर है कि इसने कुछ बहुत ही रोचक सवाल उठाएं हैं।

उनका कहना था, ''ये तो सच है कि सफल फ़िल्म स्टार और खिलाडी़ कम उम्र में मरते हैं तो क्या इसका मतलब ये है कि कम उम्र में मिली शोहरत के कारण बाद के दिनों में लोग अपनी सेहत का ख़्याल नहीं रखा पाते हैं ख़ासकर जब शोहरत कम हो जाती है।''

प्रोफ़ेसर एप्सटिन के अनुसार कारण चाहे जो भी हो इस रिपोर्ट को उन नौजवानों के लिए चेतावनी समझी जानी चाहिए जो कि स्टार बनने का सपना रखते हैं।

सेलेब्रेटी लोगों के जीवन शैली का अध्ययन करने वाली मनोवैज्ञानिक हनी लैंगकैस्टर जेम्स का कहना है कि स्टार का दर्जा पाने वालों की तादाद इतनी कम है कि वैज्ञानिक तौर पर इसका विश्लेषण करना मुश्किल है कि लोगों के जीवन पर स्टार होने के क्या प्रभाव पड़े हैं।
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हनी जेम्स कहती है, ''सफल लोग अपने पेशे में उस स्थान पर बने रहने के लिए भारी क़ीमत चुकाते हैं।''

लेकिन जेम्स का ये भी कहना है कि इस तरह के शोध की कोई वैज्ञानिक व्याख्या करना मुश्किल है।
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