फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग का कहना है कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से बात कर अमेरिकी ख़ुफ़िया कार्यक्रम पर 'हताशा ज़ाहिर' की है। 29 साल के ज़करबर्ग ने अपने ब्लॉग में लिखा है, "अमेरिकी सरकार को इंटरनेट अधिकारों के लिए काम करना चाहिए न कि इंटरनेट के लिए ख़तरा बनना चाहिए।"
ज़करबर्ग की यह टिप्पणी उस रिपोर्ट के एक दिन बाद आई है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सरकार ने अपनी ख़ुफ़िया निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए फ़ेसबुक के एक सर्वर की वायरस के ज़रिए नकल कर ली है। अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने इस रिपोर्ट को ग़लत बताया है।
इससे पहले सितंबर 2013 में ज़करबर्ग ने कहा था कि इंटरनेट पर जासूसी के मामले में अमेरिका बहुत आगे बढ़ गया है। उन्होंने गुरुवार को यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तविक सुधारों में बहुत वक़्त लगेगा।
भरोसा टूटा?
अपने ब्लॉग में ज़करबर्ग ने लिखा, "हमारे इंजीनियर जब जीतोड़ मेहनत करते हैं तो हमें लगता है कि हम आपकी अपराधियों से सुरक्षा कर रहे हैं, न की अपनी ही सरकार से।"
उन्होंने लिखा, "अमेरिकी सरकार को इंटरनेट अधिकारों का समर्थक बनना चाहिए न कि ख़तरा। अपने काम में उन्हें और अधिक पारदर्शी होने की ज़रूरत है नहीं तो लोग बुराई में विश्वास करने लगेंगे।"एनएसए के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन ने अमेरिका के व्यापक इंटरनेट ख़ुफ़िया निगरानी कार्यक्रम की जानकारी पिछले साल लीक की थी।
एडवर्ड स्नोडेन ने जो दस्तावेज़ लीक किए थे उनसे अमेरिका के व्यापक फ़ोन रिकॉर्डिंग, फ़ाइबर ऑप्टिक केबलों को टेप करने और अन्य नेटवर्क को हैक करने के कार्यक्रम के बारे में पता चला था।
इंटरनेट के लिए ख़तरा?
लीक दस्तावेज़ों के मुताबिक़ अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी की पहुंच नौ बड़ी तकनीकी कंपनियों के सर्वरों तक है। इनमें माइक्रोसॉफ़्ट, याहू, गूगल, फ़ेसबुक, पालटॉक, एओएल, स्काइप, यू्ट्यूब और ऐपल शामिल हैं। हालांकि इन सभी कंपनियों ने ख़ुफ़िया निगरानी कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार किया है।
इन रिपोर्टों के बाद फ़ेसबुक, गूगल, ऐपल, माइक्रोसॉफ़्ट, लिंक्डइन, ट्विटर, एओएल और याहू ने मिलकर सरकारी निगरानी में सुधार के लिए एक समूह बनाया है। इस समूह ने अमेरिकी निगरानी में व्यापक सुधारों की माँग की है।
अपने ताज़ा ब्लॉग में ज़करबर्ग ने कहा है कि यदि इंटरनेट को मज़बूत रखना है तो उसे सुरक्षित रखना होगा। इसी सप्ताह एडवर्ड स्नोडेन ने एक कांफ्रेंस में कहा था कि अमेरिका का व्यापक निगरानी कार्यक्रम इंटरनेट के भविष्य के लिए ख़तरा है।
इसी महीने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष नीली क्रोएस ने कहा था कि दुनियाभर में अरबों लोग इंटरनेट पर भरोसा नहीं करते हैं।