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कहां गायब हो गया अमेरिकी जासूस?

Wed, 26 Jun 2013 01:30 PM IST
मास्को
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रूस ने कहा है कि अमेरिकी खुफिया जानकारियां सार्वजनिक करने वाले भगोड़े एडवर्ड स्नोडेन को पनाह देने में रूस की कोई भूमिका नहीं रही है।
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अमेरिकी जासूस एडवर्ड स्नोडेन मास्को के लिए हांगकांग से उड़ान भरने के बाद से कहां हैं। इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

चर्चा थी कि स्नोडेन ने मास्को में शरण ली है, लेकिन रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को कहा है कि स्नोडेन रूस की सीमा में नहीं है। लावरोव ने कहा कि रूस का स्नोडेन से कोई लेना देना नहीं है।

अमेरिका ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि चीन और रूस ने स्नोडेन को हांगकांग से मास्को जाने में मदद की।

अमेरिका के इस आरोप को रूस और चीन दोनों ने 'आधारहीन' बताया और कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

चीन का 'जवाब'
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हांगकांग की सरकार ने पूर्व अमेरिकी खुफिया कॉन्ट्रैक्टर के मामले को कानून के दायरे में रहकर संचालित किया।

अमेरिका ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि मान्य गिरफ्तारी वारंट होने के बावजूद एक भगोड़े को छोड़ना सोच-समझकर लिया गया फैसला है।

ख़बर थी कि स्नोडेन ने वेनेजुएला में राजनीतिक शरण मांगी है। उनका सोमवार को मास्को से क्यूबा जाने का कार्यक्रम था और फिर उन्हें वहां से वेनेजुएला होते हुए उन्हें इक्वाडोर जाना था।
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लेकिन मास्को से हवाना जाने वाली उड़ान में स्नोडेन की सीट खाली थी। तभी से ये सवाल उठ रहा है कि वो आखिर हैं कहां?

सीआईए के पूर्व कर्मचारी स्नोडेन लोगों की इंटरनेट और फोन गतिविधियों पर नजर रखे जाने के अमेरिकी कार्यक्रम की जानकारी लीक करके सुर्खियों में आए थे।

प्रत्यर्पण
इस मुद्दे पर अमेरिका और रूस के रिश्तों में भी तल्खी आ गई है। अमेरिका ने कहा है कि अगर रूस ने स्नोडेन को उसके हवाले नहीं किया तो दोनों देशों के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं।

इस बीच इक्वाडोर के विदेश मंत्री रिकार्डो पेटिनो ने कहा है कि उन्हें स्नोडेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

वियतनाम की यात्रा पर आए पेटिनो ने हनोई में कहा कि अमेरिका ने स्नोडेन के बारे में उनकी सरकार से बात की थी।

अमेरिकी न्याय विभाग ने स्नोडेन के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। स्नोडेन के खिलाफ मुकदमा खुफिया निगरानी अभियान का ब्यौरा सार्वजनिक करने के आरोप में दर्ज कराया गया है।

स्नोडेन पर ‘सरकारी संपत्ति की चोरी’, ‘राष्ट्रीय रक्षा सूचना के अनधिकृत संचार’ और ‘जान-बूझकर खुफिया सूचना का संचार’ का आरोप लगा है।

आरोप
इनमें हर आरोप के लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।

स्नोडेन ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के एक गोपनीय अभियान ‘प्रिज्म’ के तहत बड़ी तादाद में फोन कॉल्स और इंटरनेट से जुड़ी जानकारियां इकट्ठी की गई हैं।
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स्नोडेन का आरोप था कि अमेरिकी खुफिया विभाग चीनी कंप्यूटर नेटवर्क की हैंकिंग भी करता था। इस जानकारी के सामने आने के बाद ओबामा प्रशासन के लिए भारी शर्मिंदगी की स्थिति बन गई थी।

इसके बाद से ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने दुनिया भर के निजी यूजरों के टेलीफोन और इंटरनेट डेटा हासिल करने की कार्रवाई का बचाव करना शुरू कर दिया।

उनका कहना है कि किसी अमेरिकी या अमेरिकी बाशिंदे को 'प्रिज्म' के तहत निशाना नहीं बनाया गया है और इसकी देखरेख न्यायाधीश करते हैं।
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