आपकी जन्म कुंडली में अभी दशाक्रम प्रतिकूल है। शनि की अन्तर्दशा चली हुई है और शनि वक्री अवस्था में छठे भाव में स्थित है। छठा भाव रोग, ऋण तथा शत्रुओं का माना जाता है। इसीलिए आप अभी कर्जे में डूबे हुए हैं।
इस दशा को निकलने दें, उसके बाद अपको अनुकूल फल मिलेगें। साथ ही आपकी कुंडली में शनि की जाती हुई साढ़ेसाती है जो नवंबर के पहले सप्ताह में समाप्त हो जाएगी। उसके बाद आपको कुछ राहत भी मिलेगी।
आपकी घरेलू समस्याएँ भी धीरे-धीरे दूर होगी। आप प्रतिदि गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करें। एक नीली शनि के लिए दाएँ हाथ की मध्यमा अंगुली में चाँदी में बनवाकर शुक्ल पक्ष के शनिवार को सुबह के समय पूजा कर के पहन लें।
हर शनिवार को शनिदेव की पूजा अवश्य करें। साथ ही दाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली में एक पन्ना भी शुक्ल पक्ष के बुधवार को सुबह के समय पहन लें।