राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ के संयुक्त सत्र के अपने पहले संबोधन में मंगलवार को कहा कि वह पार्टी लाइन के पार पहुंचने के लिए उत्सुक थे और आम अमेरिकियों की मदद के लिए ‘ओछी लड़ाई’ को अलग रखते हैं।
इस दौरान ट्रंप ने आव्रजन नीति पर भी नरम रुख अपनाया और योग्यता पर आधारित नीति अपनाने की अपील की ताकि भारत जैसे तकनीकी पेशेवरों को इसका लाभ मिल सके। एच-1 बी वीजा को लेकर चल रहे धुंधलके के बीच यह बयान भारतीयों के लिए शुभ संकेत है।
इस संबोधन से ठीक एक घंटे पहले ट्रंप ने अप्रवासी मुद्दे पर नरम रुख अपनाते हुए व्हाइट हाउस में कहा कि वह बिना दस्तावेज के अमेरिका में रह रहे उन प्रवासियों को भी कानूनी दर्जा प्रदान करेंगे जो किसी भी गंभीर अपराध में संलिप्त नहीं हैं। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एमनेस्टी की इस सलाह पर ट्रंप के कट्टर समर्थक उनकी निंदा कर चुके हैं।
उन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र में योग्यता आधारित आव्रजन नीति की पैरवी करते हुए कहा, ‘मौजूदा निम्न-कुशल आव्रजन प्रणाली के स्थान पर योग्यता-आधारित आव्रजन प्रणाली अपनाने से कई लाभ होंगे। इससे डॉलर की बड़ी बचत होगी, कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा और प्रवासियों के परिवारों समेत संघर्ष कर रहे मध्यम वर्ग के परिवारों को भी मदद मिलेगी।’
ट्रंप के ये विचार अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले अप्रवासियों पर कानूनी कार्रवाई से पीछे हटने वाला है जिसके तहत उन्होंने दफ्तर संभालने के पहले ही सप्ताह में कार्यकारी आदेश दिया था। अमेरिकी चुनाव में ट्रंप के कट्टर समर्थकों ने इसी मुद्दे पर उन्हें व्हाइट हाउस पहुंचाया था कि वह अप्रवासियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र में ट्रंप ने कहा कि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी योग्यता पर प्रवासियों को वीजा देने की व्यवस्था है। उनकी राय में इससे अमेरिका में भी पैसा बच सकता है और कामगारों के वेतन भी बढ़ाए जा सकते हैं। ट्रंप ने प्रवासी नियमों में सुधार के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी से सहयोग मांगा और कहा कि यदि सरकार नौकरियों की बेहतरी पर जोर दे तो प्रवासी कानूनों में बदलाव संभव है।
भारतीयों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में जो कुछ कहा यदि वह हकीकत बन जाए तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत के आईटी कर्मचारियों को मिलना तय है। एच-1 बी वीजा पर अमेरिका में बसने वाले विदेशियों में भारतीय आईटी सेक्टर के कर्मचारियों की संख्या सबसे ज्यादा है।
इनके अलावा भारत से अमेरिका जाने वाले वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, इंजीनियरों को भी योग्यता पर आधारित वीजा सिस्टम का भरपूर लाभ मिल सकता है। बहरहाल, ट्रंप की नीतियों में आए इस बदलाव से उन भारतीयों को राहत जरूर मिली है जो एच-1 बी वीजा नियमों के सख्त होने की आशंका से चिंतित थे।