अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर राजी हो गए हैं कि वो ईरान पर परमाणु प्रतिंबध नहीं थोपेंगे। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह आखिरी बार होगा जब ट्रंप ने इस तरह की छूट दी है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप चाहते हैं कि उनके यूरोपीय साथी 60 दिनों की इस अवधि का उपयोग ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए आपसी सहमति बनाने के लिए करें।
जिस समय ईरान को प्रतिबंधों से छूट दी गई, ठीक उसी समय यूएस ट्रेजरी ने ईरान के 14 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया। जिसमें ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख आयतुल्ला सादिक आमुली लारीजानी का नाम भी शामिल है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ईरान नाभिकीय समझौते को बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है। अपने बयान में उन्होंने इस बात को साफ कर दिया है कि यह आखिरी बार है जब प्रतिबंध को माफ किया गया है। अधिकारी ने कहा कि ट्रंप अब इस मामले पर अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
ईरान नाभिकीय समझौते के पक्षकार यूरोपीय देश इस डील में बने रहना चाहते हैं जबकि अमेरिका चाहता है कि 60 दिनों की इस अवधि के दौरान सभी यूरोपीय देश ईरान समझौते की जगह एक नए एग्रीमेंट पर आपसी सहमति बनाएं। इस डील के लिए होने वाली चर्चा में ईरान को शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि अगर वो एग्रीमेंट की शर्तों को तोड़ेगा तो उसे अमेरिका सहित यूरोपीय प्रतिबंधों के अधीन रहना पड़ेगा।
अधिकारी ने आगे बताया कि यह डील स्थायी होगी। यह डील 2015 के समझौते की तरह एक दशक बाद खुद ही खत्म नहीं होगी। यह डील ईरान के मिसाइल क्रर्यक्रमों के अलावा उसके परमाणु हथियारों पर भी पैनी नजर रखेगी। इसके साथ ही सयुंक्त राष्ट्र द्वारा ईरान की साइटों के निरीक्षण की भी व्यवस्था होगी।