अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को 2015 के ईरान परमाणु समझौते को बड़ा झटका दिया। उन्होंने इस समझौते को प्रमाणित नहीं किया है। हालांकि उन्होंने इस समझौते को खत्म नहीं किया, और इसे कांग्रेस के पास भेज दिया। अमेरिका के इस कदम की पड़ोसी देश आलोचना कर रहे हैं।
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रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है। इन देशों ने कहा कि अमेरिका इस तरह डील को एकतरफा खत्म नहीं कर सकता। आपको बता दें कि ट्रंप ने व्हाइट हाउस में ईरान को वैश्विक स्तर पर आतंक फैलाने वाला बताया था। उन्होंने इस समझौते को तोड़ने की धमकी देते हुए इसे कांग्रेस के पास भेज दिया।
आपको बता दें हर 90 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस को प्रमाणित करते हैं कि ईरान इस समझौते का पालन कर रहा है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकलता है तो यह समझौता खत्म हो जायेगा। रूस ने ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।
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ट्रंप की इस कार्रवाई के बाद ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी ट्रंप पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के आरोप निराधार हैं। परमाणु समझौते पर ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका अकेला पड़ गया है। आपको बता दें कि केवल इजरायल और गल्फ देश ही ट्रंप के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं।