डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो इस हमले का जवाब "अपनी पूरी ताकत से" देंगे और उन्होंने सेना के इस्तेमाल से इनकार भी नहीं किया है। बीते साल सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले इदलिब शहर में हुए संदिग्ध रासायनिक हमले में कम से कम 58 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग जख्मी हुए थे। इसके बाद अमेरिका के 50 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों ने सीरिया के एयरबेसों को निशाना बनाया था। सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद की सेना के खिलाफ ये अमेरिका पर पहला सीधा हमला था।
बीते सप्ताह शनिवार को हुए हमले के बाद अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ इस मामले में चर्चा कर रहा है और साथ में सैन्य कार्यवाई की संभावना तलाश रहा है। मंगलवार को इस मुद्दे पर ट्रंप ने ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीजा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात की। वाशिंगटन में मौजूद बीबीसी की बारबारा उशर प्लैट कहती हैं कि ट्रंप का लातिन अमेरिका दौरा रद्द करने का फैसला ये बताता है कि अमेरिका का जवाब सीमित हमले की बजाय बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकता है।
मंगलवार को फ्रांसीसी सरकार के प्रवक्ता बेन्यामिन ग्रीवॉक्स के हवाले से समाचार एजेंसी एएफपी ने कहा, "अगर खतरे की लकीर को लांघा गया है तो जवाब दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा की गई है जिसमें रायासनिक हथियारों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है।"
हालांकि इस संदिग्ध हमले की पुष्टि के संबंध में अमेरिका और फ्रांस ने अब तक कोई सबूत पेश नहीं किए हैं। जिस इलाके में केमिकल हमला हुआ है वो पूरी तरह से कटा हुआ है और वहां आने-जाने की सुविधा नहीं है। ऐसे में मृतकों या घायलों की संख्या का सही अंदाजा लगाना मुश्किल है।
रूस का कहना है कि उसे डूमा में क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका सैन्य कार्यवाई करता है तो उसे इसके "गंभीर परिणाम" भुगतने होंगे।