अमेरिका में जाकर काम करने वाले विदेशी कामगारों पर नजरें टेढ़ी करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता पर भी लगाम कसना चाहते हैं। मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो ट्रंप प्रशासन द्वारा तैयार विवादित ड्राफ्ट पर अगर राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर देते हैं तो इससे धार्मिक आधार पर व्यक्ति और संगठनों को सेवाओं में मिलने वाले लाभ अब नहीं मिल सकेंगे।
इकॉनोमिक टाइम्स की खबर के अनुसार 'इस्टेब्लिशिंग ए गर्वनमेंट वाइड इनिशिएटिव टू रेसपेक्ट रिलिजियस फ्रीडम' शीर्षक से तैयार ड्राफ्ट पूर्व की कई व्यवस्थाओं को अलग कर देता है।
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो यह देशव्यापी बहस को जन्म दे सकता है। इसके तहत समलैंगिक और प्रजनन अधिकारों जिन पर राज्यों और अदालतों द्वारा लगातार मंथन किया जा रहा है उनक मुद्दा भी चर्चा में आ जाएगा।
वहीं, वाशिंगटन पोस्ट की एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि यह ड्राफ्ट व्यापक सेवाओं में व्यक्तियों और संगठनों की व्यापक छूट को खत्म करेगा जिसे लोग धार्मिक आधार पर प्राप्त करते रहे हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी सीन स्पाइसर कहते हैं कि फिलहाल ट्रंप प्रशासन की सीधे ऐसी कोई योजना नहीं है। हाल फिलहाल तो इस तरह का कोई आदेश भी नहीं है जो इस तरह के मुद्दों को प्रभावित कर सके।