अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना अभूतपूर्व फैसला सुनाया है। उन्होंने वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा विभिन्न देशों में नियुक्त सभी राजदूतों को आदेश दिया है कि वे 20 जनवरी को उनका कार्यकाल शुरू होने के दिन तक विदेशों में अपने अपने पदों को छोड़ दें। राजनीतिक रूप से नियुक्त होने वाले इन राजदूतों को ट्रंप ने ग्रेस पीरियड भी नहीं दिया है।
ट्रंप की ट्रांजिशन टीम ने ‘बिना किसी अपवाद’ के यह आदेश 23 दिसंबर को ही जारी कर दिया था। जिन राजनयिकों ने इसे देखा उन्होंने कहा कि - ‘इस फैसले के बाद कुछ महीनों के लिए अमेरिका को ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा जैसे कुछ खास देशों में दूतों के बिना ही काम करना पड़ेगा।’
इसका एक अर्थ यह भी हुआ कि राजदूतों के परिवार को बहुत कम नोटिस काल में अमेरिका अथवा उनके अपने देश में में लौटना पड़ेगा। जबकि इससे पहले दो पार्टियों के सत्ता परिवर्तन होने पर पुराने राजदूतों को एक-एक करके नए राजदूत द्वारा कार्यभार ले लेने के बाद कार्यमुक्त किया जाता था। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से ट्रंप का यह फैसला काफी सख्त है।