भारत में जन्मे अमेरिका के पूर्व वरिष्ठ संघीय अभियोजक प्रीत भरारा ने खुद को हटाए जाने पर सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति को फोन न करने का उनका फैसला सबके हित में था। दरअसल, उन्हें बर्खास्त किए जाने से ठीक दो दिन पहले ट्रंप के दफ्तर से फोन आया था और उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति को फोन कर बात करने को कहा गया था।
लेकिन भरारा ने दोबारा कभी फोन नहीं किया। 48 वर्षीय भरारा ने कहा, ‘फोन न करके मैंने सबके हित में काम किया था।’ मैनहटन के पूर्व अभियोजक ने पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ डीन ट्रेवर मॉरीसन से यह बात कही। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने फोन क्यों नहीं किया, इस पर भरारा ने कहा कि व्हाइट हाउस और न्याय विभाग के बीच संपर्क को लेकर अलग नियम हैं।
उन्होंने पुराने विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके और ट्रंप के बीच इस तरह की बातचीत से भविष्य में होने वाली किसी भी जांच को लेकर लोगों के दिमाग में संदेह अवश्य पैदा होता।
भरारा ने कहा, ‘इस धरती पर कौन यह मानने को तैयार होता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अभूतपूर्व कदम उठाते हुए महज अमेरिकी अटॉनी से एक औपचारिक संबंध निभा रहे थे, जिनके न्याय क्षेत्र में कई प्रकार की चीजें हैं।’ भरारा ने जोर देकर कहा कि इस प्रकार से देखें तो मैंने फोन नहीं करके कई लोगों को तमाम परेशानियों से बचा लिया।