वुल्फ की मानें तो व्हाइट हाउस पहुंचते ही ट्रंप ने वहां अराजकता मचा दी। उन्हें सलाह देना सबसे मुश्किल काम होता है क्योंकि वह हर विषय को खुद को विशेषज्ञ मानते हैं। भले उनके विचार कितने तुच्छ क्यों न हों। दावा है जीत के बाद ट्रंप पूरी तरह बदल गए। वह मानने लगे हैं कि वह पूरी तरह राष्ट्रपति बनने के काबिल थे।
एच-1 बी वीजा पर नरम थे ट्रंप
वुल्फ ने किताब में दावा किया है कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप एच-1 वीजा मुद्दे पर काफी नरम थे। 14 दिसंबर, 2016 को जब ट्रंप टॉवर में सिलिकॉन वैली के प्रतिनिधिमंडल ने ट्रंप से मुलाकात की तब ट्रंप एच-1 बी वीजा के पक्ष में थे। इस मुलाकात के बाद उसी दिन दोपहर को फोन पर बातचीत में ट्रंप ने रूपर्ट मर्डोक से कहा कि तकनीकी उद्योग को इस वीजा की जरूरत है। अभी उद्योग में बेहद ज्यादा प्रावधान है और ओबामा ने इन लोगों का साथ नहीं दिया।
मेरे पास इन लोगों की मदद करने का मौका है। इस पर मर्डोक ने कहा, डोनाल्ड आठ साल से ओबामा इन लोगों की जेब में थे। यही प्रशासन चल रहे थे। इन्हें मदद की जरूरत नहीं है। मर्डोक ने ट्रंप को सुझाव दिया कि एच-1 बी वीजा पर उदार नीति से अमेरिका के दरवाजे कुछ चुनिंदा प्रवासियों के लिए खुल जाएंगे। ऐसे में उनकी प्रवासियों को रोकने की नीतियों का क्या होगा।
दावा है कि ट्रंप को समझा पाने से नाकाम रहने पर मर्डोक ने फोन रखने के बाद ट्रंप को मूर्ख कहा था। हालांकि वीजा पर ट्रंप का यह नरम रुख इस मुद्दे पर जनता के बीच आई बातों और नीतियों से बिल्कुल अलग है। ट्रंप चुनाव प्रचार के दौरान और जीत के बाद वीजा नियमों को कठोर करने की बात कह रहे हैं।