यूक्रेन की सरकार के साथ ही यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी क्राईमिया क्षेत्र में जनमत संग्रह कराने संबंधी रूस की कोशिशों की आलोचना की है और इसे ग़ैरक़ानूनी करार दिया है।
ब्रसेल्स में आयोजित यूरोपीय संघ की एक बैठक में रूस को चेतावनी दी गई कि यदि इस समस्या का हल वो जल्दी नहीं निकालता है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
इससे पहले क्राईमिया के सांसदों ने जनमत संग्रह के लिए 16 मार्च की तारीख़ तय कर दी थी।
यूक्रेन की अंतरिम सरकार ने इस मतदान को ग़ैरक़ानूनी बताया था।
यूक्रेन के रूस समर्थक राष्ट्रपति के सत्ता छोड़ने के बाद से ही रूसी सेनाओं ने क्राईमिया को अपने नियंत्रण में ले लिया था। क्राईमिया में ज़्यादातर लोग रूसी मूल के हैं।
क्राईमिया के सांसदों ने रूसी संघ में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया है।
क्राईमिया के सांसदों ने गुरुवार को रूसी संघ में शामिल होने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।
संसद ने कहा था कि उसने रूस के राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करें।
चेतावनी
ब्रसेल्स सम्मेलन से पहले जर्मनी के नेतृत्व में यूरोपीय संघ के कुछ सदस्यों ने संकेत दिया था कि कोई कड़ा क़दम उठाने की बजाय वो चाहेंगे कि इस समस्या से निपटने में रूस भी सहयोग करे।
लेकिन ब्रसेल्स में मौजूद बीबीसीसंवाददाता मैथ्यू प्राइस का कहना है कि क्राईमिया के सांसदों ने साफ़ ज़ाहिर कर दिया है कि वो यूरोपीय संघ की कोशिशों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
बातचीत के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल और यूरोपीय संघ की परिषद के अध्यक्ष हर्मन वान रोम्पुई ने कहा कि क्राईमिया का जनमत संग्रह यूक्रेन के संविधान से मेल नहीं खाता है इसलिए वो ग़ैरक़ानूनी है।
यूरोपीय संघ का ये भी कहना है कि यदि रूस समस्या के समाधान में मदद नहीं करता है तो उस पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं जिनमें यात्राओं को रोकना और यूरोपीय संघ और रूस के साथ होने वाले सम्मेलन को रद्द भी किया जा सकता है।