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ये है वो CIA एजेंट जिसने असली सद्दाम को पहचाना

Thu, 05 Jan 2017 05:40 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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John Nickson
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जब 2003 में इराक के पूर्व राष्ट्रपति को पकड़ा गया था तो सीआईए को एक विशेषज्ञ की जरूरत थी, जो उन्हें पहचान सके और पूछताछ कर सके। वह विशेषज्ञ थे जॉन निक्सन। निक्सन 1998 में सीआईए में भर्ती होने से पहले सद्दाम हुसैन पर अध्ययन कर रहे थे।
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बीबीसी के एक प्रोग्राम में उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्होंने क्या किया था। निक्सन दुनिया भर के नेताओं की गहरी परख रखने का काम करते हैं। वे कहते हैं, ''जब नीति निर्माता संकट की घड़ी में होते हैं तो वे हमारे पास कुछ सवालों के साथ आते हैं। पूछते हैं कि वे लोग कौन हैं, आखिर वे चाहते क्या हैं और ऐसा वे क्यों कर रहे हैं''। निक्सन 'डिब्रिफिंग द प्रेसिडेंट: द इन्ट्रोगेशन ऑफ सद्दाम हुसैन' किताब के लेखक हैं।

उन्होंने इस किताब में लिखा है पूर्व इराकी नेता सद्दाम हुसैन विरोधाभासों से भरे थे। जब अमेरिकी सैनिकों ने बेदखल नेता सद्दाम हुसैन को खोज निकाला तो निक्सन इराक में थे। सद्दाम अपने गृहनगर तिकरित के पास एक भूमिगत खोह में मिले थे। जब सद्दाम हुसैन के पकड़े जाने की खबर सामने आई तो अमेरिका इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि वह शख्स सद्दाम ही है।
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यह काम निक्सन को सौंपा गया। उस वक्त अफवाह थी कि कई नकली सद्दाम हुसैन हैं। हालांकि 2011 में सीआईए छोड़ने वाले निक्सन ने कहा कि उनके दिमाग में सद्दाम को पहचानने को लेकर कोई दुविधा नहीं हुई। निक्सन ने कहा, ''जब मैंने उनसे बात करनी शुरू की तो उन्होंने वही तेवर दिखाया जो सालों से मेरे डेस्क पर पड़ी किताब में था।'' सद्दाम हुसैन से पूछताछ की जिम्मेदारी निक्सन को दी गई। निक्सन पहले शख्स थे जिन्होंने सद्दाम हुसैन से विस्तार से पूछताछ की। निक्सन ने कई दिनों तक यह काम किया था।

अमेरिकी मीडिया की पिक्चर से अलग थे सद्दाम

Saddam Hussein
निक्सन ने कहा, 'मैं खुद को प्रेरित करता रहा कि दुनिया के मोस्ट वॉन्टेड शख्स से सवाल-जवाब कर रहा हूं। यह थोड़ा बेढंगा लग रहा था।'' निक्सन ने कहा कि सद्दाम हुसैन से पूछताछ करते हुए उन्हें लगा कि इस पूर्व राष्ट्रपति में व्यापक पैमाने पर विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा, ''मैंने सद्दाम में एक मानवीय पक्ष भी देखा। अमेरिकी मीडिया ने जो छवि पेश की है उससे यह बिल्कुल उलट थी। वह अपने आप में एक चमत्कारी व्यक्ति थे और ऐसे शख्स से मेरा कभी पाला नहीं पड़ा था। हो सकता है वह आकर्षक, अच्छा और विनम्र बनना चाहते हों। लेकिन एक दूसरा पहलू भी था।

निक्सन ने कहा, ''सद्दाम अशिष्ट, घमंडी और बदतर थे। आपा खोने के बाद वह डरावना लगते थे। ऐसे दो या तीन वाकये आए जब मेरे सवाल के कारण उनके बुरे पक्ष सामने आए। जब उनसे पूछताछ की जा रही थी तब वह उस गंदे कमरे में काफी असंयमित लग रहे थे। वह एक कुर्सी पर बैठे हुए थे।'' निक्सन इस बात को स्वीकार करते हैं कि सीआईए ने सद्दाम के सामने बातचीत के दौरान छोटे प्रलोभन की पेशकश की थी।

उन्होंने कहा, ''हमने अपील की थी कि उनके इतिहासबोध और विचार दुनिया के सबसे बड़ी शक्ति के द्वारा सुनने के लिए रिकॉर्ड किया जा रहा है। सद्दाम हुसैन से सीआईए को खास चीजों पर बात करनी थी अन्यथा उन्हें अपनी शर्तों पर छोड़ दिया गया था। मुझे पता है कि मैंने कोशिश की थी और जवाब भी मिले थे। एजेंसी के लिए काम करते हुए आप सीखते हैं कि कैसे पूछताछ करनी है और उसका कैसे इस्तेमाल करना है। लेकिन आपको काफी सतर्क रहना होता है। आप ये जोखिम नहीं उठा सकते कि जो सूचना आपको निकालनी है उसे ही निकालने में कामयाबी नहीं मिले।''
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परमाणु कार्यक्रम को वर्षों पहले बंद कर चुका था इराक

Saddam
निक्सन ने कहा, ''पूछताछ के दौरान मेरे लिए सबसे अहम विषय था जनसंहारक हथियार। अमेरिका और ब्रिटेन ने यही आरोप लगाकर इराक के साथ युद्ध छेड़ा था कि उसके पास खतरनाक हथियार हैं। वाइट हाउस इन सारी चीजों को जानना चाहता था।'' लेकिन क्या सद्दाम हुसैन से बातचीत, उनके सलाहकारों और बाद के अनुसंधानों में इस बात की पुष्टि हुई या फिर उन्होंने इन दावों को खारिज कर दिया?

निक्सन ने कहा, ''मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि पूर्व इराकी नेता ने देश में परमाणु कार्यक्रम को वर्षों पहले रोक दिया था और उसे फिर से शुरू करने का कोई इरादा नहीं था। तब उस कमरे में निक्सन के साथ पॉलिग्राफर और एक अनुवादक मौजूद था।

पहले सेशन के अंत में निक्सन ने सद्दाम के साथ बढ़िया माहौल बनाकर बात करने की कोशिश की। निक्सन ने कहा कि सद्दाम को महीनों के लिए छिपा दिया गया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत सकारात्मक थी लेकिन सद्दाम जब दोबारा आए तो ज्यादा संदिग्ध लग रहे थे। मेरा मानना है कि मैंने जितने लोगों से मुलाकात की उसमें उनमें सद्दाम जितना संदिग्ध कोई नहीं था।

निक्सन भी मानते हैं कि इराक में सद्दाम के जाने के बाद स्थिति और बुरी हुई है। पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बुश के बारे में उन्होंने कहा कि वह सच तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने कहा कि बुश प्रशासन को नहीं पता था कि सद्दाम हुसैन के जाने के बाद इराक़ में क्या होगा।
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