अमेरिका में पिछले एक साल से राष्ट्रपति चुनाव में रूस के हस्तक्षेप का मुद्दा छाया हुआ है और उसकी जांच भी हो रही है। पर हालिया अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी चुनाव की निष्पक्षता को रूस से ज्यादा चीन से खतरा है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड से लेकर नेपाल और पेरू जैसे देशों के चुनाव में चीन के हस्तक्षेप की रिपोर्ट सामने आई हैं।
फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद मार्का रूबिया के मुताबिक चीन लोकतांत्रिक प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल करने का अभियान छेड़ हुए है। वह अमेरिका की जन नीति, आधारभूत आजादी को प्रभावित कर रहा है। इससे पहले मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एम टर्नबुल ने विदेशी राजनीतिक चंदे पर रोक लगाई थी क्योंकि चीन की ओर से चुनाव को प्रभावित करने की खबरें सामने आई थीं।
इसके बाद बुधवार को एक खत सामने आया जिसमें चीन ने आस्ट्रेलिया में मौजूद अपने नागरिकों से अपील की कि वे सत्ताधारी लेबर पार्टी के खिलाफ वोट करें। इस साल सितंबर में न्यूजीलैंड में भी चीन द्वारा चुनाव को प्रभावित करने का मुद्दा खूब उछला था।
चीन ने जांबिया, पेरू और नेपाल में भी भारी-भरकम निवेश कर वहां के चुनाव प्रचार को प्रभावित करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादातर मामलों में आर्थिक हित चीन की पहली प्राथमिकता होते हैं।
नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी की शांति कलथिल के मुताबिक चीन सरकार दूसरों देशों में अपने हिसाब से मानदंड और माहौल तैयार करने के लिए अरबों डालर खर्च कर रही है। दूसरों देशों में बड़ी संख्या में चीन के छात्र और लोग रहते हैं, ये उनकी नीतियों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। वहीं चीन की सुरक्षा एजेंसियां इन लोगों पर पूरी नजर रखती हैं कि यह चीन के खिलाफ कोई बयान आदि न दें। चीन बड़े राजनेताओं को उपहार