मनोविश्लेषक डोनाल्ड विन्नीकॉट ने 70 साल पूर्व सबसे पहले अच्छी मां बनने का आइडिया दिया था।
आज़ माता-पिता को बच्चों की देखभाल की सलाह देने वालों का तांता लगा है और ये अरबों पाउंड की एक इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है।
इस संबंध में बाजार में कई किताबें और पत्रिकाएं उपलब्ध हैं और टेलीविज़न पर कई शो चल रहे हैं।
हम यहां छह ऐसे लोगों का जिक्र कर रहे हैं जिन्होंने बच्चों की देखभाल के क्षेत्र में पिछले 100 सालों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
सर फ्रेडेरिक ट्रूबी किंग
बाल कल्याण सुधारक सर फ्रेडेरिक ट्रूबी किंग को न्यूजीलैंड में शिशु मृत्यु दर को बहुत हद तक कम करने का श्रेय जाता है।
उनके शोध से बच्चों के पोषण के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया। उन्हें 1925 में नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया।
लेकिन ट्रूबी किंग ने बच्चों की देखभाल के लिए जो सुझाव दिए, उसके लिए उन्हें ज्यादा जाना जाता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को हर चार घंटे में दूध पिलाया जाना चाहिए।
साथ ही फ्रेडेरिक ने कहा कि रात के समय बच्चों को दूध पिलाने से बचना चाहिए।
उन्होंने बच्चों को अलग कमरे में रखने और लंबे समय के लिए बगीचे में रखने का सुझाव दिया था ताकि उन्हें मजबूत बनाया जा सके।
फ्रेडेरिक ने रोजाना बच्चे को दस मिनट गले से लगाने की सलाह भी मांओं को दी थी।
डॉ. बेंजामिन स्पॉक
डॉ. बेंजामिन स्पॉक की किताब 'कॉमन सेंस बुक ऑफ बेबी एंड चाइल्ड केयर' सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में से एक है।
इसका सबसे पहले 1946 में प्रकाशन हुआ था और अब तक इसकी पांच करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
20वीं शताब्दी के सबसे मशहूर चाइल्डकेयर गुरू डा। स्पॉक 1960 और 1970 के दशक में अमेरिका की नीतियों के मुखर विरोधी रहे।
वियतनाम युद्ध का विरोध करने पर 1968 में उन्हें विरोध को हवा देने का दोषी ठहराया गया।
लेकिन बाद में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया था। साल 1972 में उन्होंने पीपुल्स पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था।
डॉक्टर स्पॉक ने 20वीं सदी की शुरुआत में बच्चों के लालन-पालन से जुड़े रुढ़िवादी तौर तरीकों को चुनौती दी थी।
उन्होंने बच्चों के लालन-पालन में विनम्र तरीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
साथ ही उन्होंने बच्चों के माता-पिता को सुझाव दिया कि वे अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करें और उन पर भरोसा रखें।
डॉक्टर स्पॉक कहा कि हर बच्चा अलग तरह का होता है और उसका लालन-पालन उसकी जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए।
डोनाल्ड विन्नीकॉट
जब स्पॉक के सुझाव लोकप्रियता हासिल कर रहे थे तो ठीक उसी समय विन्नीकॉट ने बीबीसी पर इस बारे में एक शो की शुरूआत की थी।
उनका शो 1943 में शुरू हुआ और 20 साल चला। ये शो इस बात पर जोर देता था कि अच्छी मां कैसे बनें।
स्पॉक की तरह विन्नीकॉट ने भी बच्चों के लालन-पालन में माता-पिता को सूझबूझ का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “जब कोई मां अपने फैसले पर भरोसा करती हैं तो वो सबसे अच्छी स्थिति में होती है।”
बालरोग विशेषज्ञ और मनोविश्लेषक विन्नीकॉट किसी तरह का नुस्खा देने में यकीन नहीं रखते थे।
उनका विश्वास समझाने के बजाए समझने में था।
पेनेलोप लीच
मनोविश्लेषक पेनेलोप लीच 1970 और 1980 के दशक में सुर्खियों में आईं थीं।
साल 1977 में आई उनकी किताब 'यूअर बेबी एंड चाइल्डः फ्रॉम बर्थ टू एज फाइव' की 20 लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
आज भी उनकी किताब काफी लोकप्रिय है।
बच्चों के लालन पालन के उनके तौर तरीकों में बच्चों को केन्द्र में रखा गया है।
उनका दर्शन है, आपने बच्चा पैदा किया है तो अब कुर्बानी दीजिए।
अपनी किताब की प्रस्तावना में उन्होंने लिखा है, “आप जो कुछ भी कर रहे हैं, जिस भी परिस्थिति से गुजर रहे हैं, अगर आप अपने बच्चे की सुनेंगे और अपनी भावनाओं को समझेंगे तो आप सही फैसला करेंगे।”
जीना फोर्ड
बच्चों को पालने के जीना फोर्ड के तौर तरीकों को कुछ ने हाथोंहाथ लिया तो किसी ने उनकी आलोचना की।
लेकिन उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया गया। पूर्व मेटरनिटी नर्स फोर्ड के सुझावों को लिबरल डेमोक्रेट नेता निक क्लेग ने बकवास करार दिया।
मम्सनेट के कुछ सदस्यों ने तो उनके तौर तरीकों पर प्रतिकूल टिप्पणियां कीं और मामला अदालत में चला गया था।
लेकिन एक समय ऐसा भी था जब चाइल्डकेयर बुक्स मार्केट में 25 प्रतिशत किताबें उनकी ही होती थी।
केट विंस्लेट जैसी मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री भी उनके प्रशंसकों में शामिल हैं।
साल 1999 में आई उनकी किताब 'द कंटेंटेड लिटल बेबी बुक' की पांच लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
उनकी सबसे अधिक बिकने किताब में बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।
जो फ्रॉस्ट
रिएलिटी टीवी शो सुपरनैनी को 47 देशों में करोड़ों लोग देखते हैं। टेलीविज़न अदाकारा और नैनी जो फ्रॉस्ट इस शो की प्रस्तोता हैं।
उनकी नटखट तकनीक दुनियाभर में माता-पिता प्रेरणा के तौर पर लेते हैं।
लेकिन जो फ्रॉस्ट के आलोचकों की भी कमी नहीं है।
न्यूकासल यूनिवर्सिटी में मीडिया और सांस्कृतिक अध्ययन की प्रवक्ता ट्रेसी जेंसन ने ‘गार्डियन’ अखबार से कहा कि सुपरनैनी ऐसी मांओं की झलक दिखाता है जो कामकाजी हैं और जिन्हें अच्छी मां बनने से पहले की अपनी हरकतों पर पछतावा है।