नव निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : file photo
एच1-बी वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव लाने संबंधी विधेयक को दो सांसदाें ने अमेरिकी कांग्रेस में फिर पेश किया है। एच1-बी वीजा के जरिये भारत और अन्य देशाें के कुशल पेशेवर अमेरिकी में उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्राें में नौकरी करते हैं। इन सांसदाें ने कहा कि इस विधेयक से कार्य वीजा का दुरुपयोग रोकने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में रिपब्लिकन पार्टी के डैरेल इसा तथा स्कॉट पीटर्स ने ‘प्रोटेक्ट एंड ग्रो अमेरिकन जॉब्स एक्ट’ विधेयक दोबारा पेश किया है। इसमें एच1-बी वीजा के लिए पात्रता की महत्वपूर्ण बदलावाें का प्रस्ताव है। इस विधेयक में एच1-बी वीजा का न्यूनतम वेतन एक लाख डॉलर वार्षिक और मास्टर डिग्री की छूट को खत्म करने का प्रस्ताव है। इन सांसदाें का कहना है कि विधेयक से एच1-बी वीजा का दुरुपयोग रोका जा सकेगा और इससे यह भी सुनिश्चित हो सकेगा कि नौकरियां दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाआें को ही उपलब्ध हों।
यह विधेयक अमेरिका स्थित कंपनियाें डिज्नी, सोकाल एडिसन तथा अन्य पर एच1-बी वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग का आरोप लगने के बाद आया है। इन कंपनियों पर अमेरिकी पेशेवराें की जगह विदेशी लोगों की नियुक्तियाें का आरोप लग रहा है, जिसे लेकर अमेरिकी कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही थी। हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनावों में भी यह मुख्य मुद्दा बना था। 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप का एजेंडा भी आव्रजन संबंधी नियमों में परिवर्तन कर अमेरिकी युवाओं में नौकरी के अवसर खड़े करना है। इस संबंध में उन्होंने श्रम विभाग को पहले ही दिन सक्रिय हो जाने के लिए कहा है।
अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों को आएंगी मुश्किलें
अमेरिकी संसद में जो विधेयक वहां के दो रिपब्लिकन सांसदों ने रखा है उसके पास हो जाने पर अमेरिका में रह रहे भारतीय पेशेवरों के सामने मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।
अमेरिकी कंपनियां भारतीय पेशेवरों को नौकरी पर रखना अधिक पसंद करती हैं, क्योंकि अमेरिकी नागरिक कम घंटे काम के एवज में वेतन व सुविधाएं अधिक मांगते हैं, जबकि भारतीय युवा कम वेतन व सुविधाओं पर अधिक देरी तक काम करते हैं।
भारतीयों की मदद के लिए दफ्तर खुलना शुरू
वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने वीजा संबंधी मुश्किलों को दूर करने के लिए कार्यालय शुरू किए हैं। इनसे भारतीय मूल के लोगों की अमेरिकी कानून के दायरे में हर संभव मदद की जाएगी। अमेरिका में ऐसे कार्यालय न्यूयॉर्क, अटलांटा, ह्यूस्टन, शिकागो और सैन फ्रांसिस्को में भी खोले जाने हैं।
क्या कहा रविशंकर प्रसाद ने?
- फोटो : ANI
हाल ही में इस मामले में आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद से पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि आगामी जनवरी में अमेरिका में नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद सरकार इस मामले में बात करेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा सख्त वीजा नीति अपनाने पर भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका ले जाने वाले डेवलपर्स और इंजीनियरों की संख्या सीमित कर देंगी और स्थानीय कॉलेजों से कैंपस प्लेसमेंट पर जोर दे सकती हैं। इन्फोसिस के मुताबिक यदि अमेरिका में कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं हुई, तो हमें स्थानीय लोगों को हायर करना होगा। खासतौर पर यहां के विश्वविद्यालयों से फ्रेशरों का चयन किया जाएगा।