अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन में पूर्व रूसी जासूस पर केमिकल अटैक के मामले में 60 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने का आदेश दिया है। उधर जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने भी चार रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने की बात की पुष्टि की है। इस मामले में अन्य यूरोपीय देशों ने भी रूसी राजनयिकों पर कार्रवाई की बात कही है।
इसे शीत युद्ध और सोवियत संघ से टकराव के दौर के बाद रूस के खिलाफ अमरीका की सबसे बड़ी कार्रवाई कहा जा रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमरीका के इस कदम से साफ होता है कि टकराव की स्थिति अब भी जारी है। रूस ने कहा है कि वो भी पलटवार करेगा।
ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने ट्वीट कर कहा, ''यह असाधारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया है। हमारे सहयोगी देशों ने ऐतिहासिक रूप से रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया है।''
यूरोपीय यूनियन के नेता पिछले हफ्ते इस बात को लेकर सहमत हुए थे कि दक्षिणी इंग्लैंड में पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया पर नर्व एजेंट से हमले के पीछे रूस का हाथ था। हालांकि रूस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमरीका सियेटल स्थित रूसी वाणिज्यदूतावास को भी बंद करेगा।
इससे पहले अमरीका ने कहा था, ''चार मार्च को रूस ने इंग्लैंड में एक ब्रिटिश नागरिक और उनकी बेटी को मारने के लिए सैन्य श्रेणी के नर्व एजेंट का इस्तेमाल किया था। यह हमला हमारे सहयोगी ब्रिटेन पर था।''
अमरीका का कहना है कि नर्व एजेंट से हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों और केमिकल वेपन कन्वेंशन का उल्लंघन है। उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने भी 13 रूसी राजनयिकों को निकालने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम ब्रिटेन के समर्थन में है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने कई देशों द्वारा रूसी राजनयिकों के निकाले जाने के फैसले का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से एक बयान में कहा गया, ''हम अपने सहयोगी देशों के इस फैसले का स्वागत करते हैं। हम सभी रूस को कड़ा संदेश देने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े हैं।