पेटेंट को लेकर चल रहे विवाद में सैमसंग जीत गया है और ऐपल को हार का सामना करना पड़ा। अमेरिकी वाणिज्य पैनल ने ऐपल के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है।
अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य आयोग यानी आईटीसी ने अपने फ़ैसले में कहा कि ऐपल ने सैमसंग के पेटेंट का उल्लंघन किया।
इसका मतलब ये है कि आई-पैड और आई-फोन के कुछ मॉडलों की बिक्री पर अमेरिका में रोक लगाई जा सकती है। ये पेटेंट थ्री-जी वायरलेस तकनीक और कई सेवाओं को एक साथ ट्रांसमिट करने की क्षमता से जुड़े हैं।
ऐपल का कहना है कि वो इस फ़ैसले के खिलाफ़ अपील करेगा। इस पर अगर अमेरिकी राष्ट्रपति के दफ़्तर से आदेश आता है, तो इसे वापस भी लिया जा सकता है।
ग़ौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में आईटीसी के एक न्यायधीश जेम्स गिल्डिया ने कहा था कि ऐपल ने इस मामले में पेटेंट का उल्लंघन नहीं किया है। ये मामला क़रीब तीन साल से अदालत में चल रहा है।
सैमसंग ने एक वक्तव्य में कहा, “हमारा मानना है कि आईटीसी के अंतिम फ़ैसले ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ऐपल सैमसंग की तकनीकी खोजों पर क़ब्ज़ा जमाता रहा है।”
सिर्फ़ चीन में बने मॉडलों पर रोक
हालांकि सैमसंग की ये जीत केवल सांकेतिक साबित हो सकती है क्योंकि प्रतिबंध केवल उन्हीं ऐपल मॉडल्स पर लगेगा जो चीन में बने हैं और अमेरिका में उनकी बिक्री वैसे भी उतनी नहीं होती।
इनमें एटी एंड टी आई-फोन-4 और आई-फोन-3, 3जीएस, आई-पैड थ्रीजी और आईपैड-2 थ्रीजी शामिल हैं।
ऐपल के प्रवक्ता क्रिस्टीन ह्येगेट ने एक वक्तव्य में कहा, “इस फ़ैसले का अमेरिका में ऐपल उत्पादों की उपलब्धि पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”
स्मार्टफ़ोन कंपनियों में जंग
ऐपल और सैमसंग के बीच कई देशों में क़ानूनी जंग चल रही है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐपल चाहता है कि गूगल के एंड्रॉयड सिस्टम की बढ़त पर ब्रेक लगे।
इसका नतीजा ये कि एंड्रॉयड सिस्टम इस्तेमाल करने वाली सैमसंग और एचटीसी जैसी स्मार्टफोन कंपनियां क़ानूनी लड़ाई में उलझ गई हैं।
पिछले साल एक अमेरिकी अदालत ने अपने फ़ैसले में सैमसंग को आदेश दिया था कि वो पेटेंट के उल्लंघन के लिए एक अरब डॉलर का जुर्माना भरे। हालांकि ये रक़म बाद में घटा दी गई थी।
विश्लेषकों का अनुमान है कि इस साल के शुरुआती तीन महीनों में सैमसंग की बिक्री ऐपल से ज़्यादा रही है। हालांकि ऐपल का स्मार्टफ़ोन बिज़नेस ज़्यादा फायदेमंद माना जाता है।